संपादकीय
27 May, 2026

12 वर्षों में नए भारत का निर्माण, विकास और वैश्विक पहचान में बड़ा बदलाव

2014-2026 तक भारत ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल क्रांति और वैश्विक पहचान में अभूतपूर्व प्रगति की है। हालांकि, आर्थिक मजबूती के साथ ही बेरोजगारी और महंगाई जैसी चुनौतियां भी विकास की राह में हैं।

नई दिल्ली, 27 मई।

2014 में 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुई राजनीतिक यात्रा को आज 12 वर्षों के बाद भारत के व्यापक बदलाव और पुनर्निर्माण के दौर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें देश की दिशा, विकास मॉडल और वैश्विक पहचान में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज हुआ है।

शुरुआत के समय जिन चुनौतियों, व्यवस्थागत कमजोरियों और निराशा के माहौल में सरकार ने जिम्मेदारी संभाली थी, उसके बाद 2026 तक पहुंचते-पहुंचते विकास की यह यात्रा एक बड़े रूपांतरण के रूप में सामने आई है, जहां बदलाव की गति और उसका प्रभाव पूरे देश में दिखाई देता है।

पिछले 12 वर्षों में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से विस्तार दर्ज किया गया है, जिसमें सड़क, पुल, सुरंग, रेलवे और हवाई संपर्क जैसी परियोजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है और राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 91,287 किलोमीटर से बढ़कर 1.65 लाख किलोमीटर से अधिक पहुंच गई है, साथ ही प्रतिदिन औसतन 38 किलोमीटर सड़क निर्माण का दावा भी किया गया है।

अटल टनल, चिनाब रेल ब्रिज और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकसित हो रहे संपर्क मार्गों को केवल इंजीनियरिंग उपलब्धियों के रूप में नहीं बल्कि बदलते भारत के आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जबकि भारतमाला, सागरमाला और उड़ान जैसी योजनाओं ने देश के विभिन्न हिस्सों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ा है।

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35-ए हटाए जाने के बाद सुरक्षा, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में बदलाव के दावे किए गए, जिसमें आतंकवादी घटनाओं में कमी और पर्यटकों की संख्या बढ़ने को सरकार उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करती है, वहीं इस फैसले पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस भी जारी रही।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका पहले की तुलना में अधिक सक्रिय मानी जा रही है, जहां जी-20 की अध्यक्षता, क्वाड जैसे समूहों में भागीदारी और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उभरती भूमिका ने भारत की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत किया है, साथ ही कोरोना महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान ने भी वैश्विक सहयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया।

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के बीच भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाने का प्रयास किया, वहीं ‘ऑपरेशन गंगा’ और ‘ऑपरेशन कावेरी’ जैसे अभियानों ने विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के जरिए सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी दर्शाया।

सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना और खाद्यान्न वितरण योजनाओं ने गरीब और ग्रामीण वर्ग तक सरकारी सहायता पहुंचाने का दावा किया, जबकि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत यूपीआई भुगतान प्रणाली ने डिजिटल लेनदेन को व्यापक स्तर पर विस्तार दिया।

दूरसंचार क्षेत्र में 4जी से 5जी की ओर तेजी से बढ़ते कदम और 6जी तकनीक की तैयारी, साथ ही स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार ने तकनीकी विकास की गति को और तेज किया है, जबकि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए तेजस, आईएनएस विक्रांत और रक्षा उत्पादन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर उरी और पुलवामा हमलों के बाद की गई सर्जिकल और एयर स्ट्राइक को निर्णायक नीति के रूप में प्रस्तुत किया गया, वहीं नक्सलवाद और उग्रवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई और शांति समझौतों को सुरक्षा सुधारों का हिस्सा बताया गया।

इस पूरे 12 वर्ष के दौर को समर्थक जहां तेज विकास और निर्णायक नेतृत्व की अवधि मानते हैं, वहीं आलोचक बेरोजगारी, महंगाई, सामाजिक ध्रुवीकरण और संस्थागत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन इस बात पर सहमति दिखाई देती है कि भारत की वैश्विक स्थिति और आर्थिक पहचान में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन के बीच देश किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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