ग्वालपारा, 28 मई।
असम के ग्वालपारा जिले में स्थित उरपाद बील झील में बेंट-टोएड गेको (साइर्टोडैक्टिलस बापमे) नामक दुर्लभ छिपकली प्रजाति की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिसे राज्य की जैव विविधता के लिहाज से एक अहम खोज माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति पहली बार असम में आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड की गई है, जिससे क्षेत्र की जैविक विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्धि का संकेत मिलता है।
शोधकर्ताओं और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने इस खोज को राज्य के वेटलैंड और वन क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया है, जहां अब भी अनेक दुर्लभ और कम ज्ञात प्रजातियां सुरक्षित रूप से निवास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इस खोज पर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसन्नता जताते हुए कहा कि असम की प्रकृति लगातार नए आश्चर्य सामने ला रही है और उरपाद बील में इस गेको का पहला आधिकारिक रिकॉर्ड राज्य की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के संरक्षण प्रयास संवेदनशील आवासों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां विभिन्न प्रजातियां अनुकूल वातावरण में फल-फूल रही हैं।
उरपाद बील लंबे समय से अपने पारिस्थितिक महत्व के कारण जाना जाता रहा है और यह अनेक जलीय एवं स्थलीय जीवों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्लभ गेको की उपस्थिति पर्यावरणीय संरक्षण उपायों और आवास सुरक्षा प्रयासों की सफलता का संकेत है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह प्रजाति साइर्टोडैक्टिलस वंश से संबंधित है, जिसे गेको की सबसे विविध प्रजातियों में शामिल किया जाता है और इनमें से कई सीमित क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं तथा पर्यावरणीय बदलावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं।
संरक्षणवादियों ने पूर्वोत्तर भारत के वेटलैंड और वन पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा पर जोर देते हुए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान और पर्यावरण निगरानी को दुर्लभ तथा स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण के लिए आवश्यक बताया है।











