ओस्लो, 02 जून ।
नॉर्वे की भारत में राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया नॉर्वे यात्रा को ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस दौरे से दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है और कई ठोस परिणाम सामने आए हैं। करीब 43 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे यात्रा ने द्विपक्षीय सहयोग को नए स्तर पर पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।
स्टेनर के अनुसार यात्रा के दौरान लगभग 30 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और भारत-नॉर्वे संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। इससे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस समूह में नॉर्वे, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। यह समझौता भारत में निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राजदूत ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक स्तर पर एक बड़ा आर्थिक केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहरों को प्रौद्योगिकी, चिकित्सा तकनीक और बंदरगाह आधारित विकास के प्रमुख केंद्र बताते हुए नॉर्वे की कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्टेनर ने भारत को दीर्घकालिक तकनीकी साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग और समन्वय पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि नॉर्वे की कंपनी इक्विनोर ने हाल ही में भारत को तरलीकृत प्राकृतिक गैस की पहली खेप भेजी है। यह दीर्घकालिक समझौता भारतीय उर्वरक उद्योग के लिए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
जलवायु परिवर्तन और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है। नॉर्वे के स्वालबार्ड क्षेत्र में हो रहे शोध के माध्यम से आर्कटिक क्षेत्र में बर्फ पिघलने और भारत में मानसून के बीच संबंधों का अध्ययन किया जा रहा है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
समुद्री अर्थव्यवस्था और समुद्री प्रौद्योगिकी को भी सहयोग का प्रमुख क्षेत्र बताया गया है। नॉर्वे का मानना है कि समुद्री क्षेत्र में तकनीकी समाधान और नवाचारों के माध्यम से दोनों देश साझा विकास के नए अवसर तलाश सकते हैं।
राजदूत ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़े हैं। कई मंत्रिस्तरीय दौरों और बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया है तथा आने वाले समय में सहयोग के नए आयाम विकसित होने की उम्मीद है।











