जांजगीर-चांपा, 01 जून।
अकलतरा विकासखंड में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है, जहां ग्राम तरौद, किरारी, लटिया सहित आसपास के क्षेत्रों की चूना पत्थर खदानों में पानी से भरे गड्ढों के भीतर बड़े पैमाने पर फ्लाई ऐश डंपिंग किए जाने के आरोप लगे हैं। इस स्थिति ने पर्यावरण, खनिज विभाग और डीजीएमएस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि फ्लाई ऐश अर्थ मूवर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित कई निजी कंपनियां पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर हजारों टन राखड़ का भराव कर रही हैं। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि जलभराव वाली खदानों में ही सीधे फ्लाई ऐश डंप की जा रही है।
क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल बिलासपुर की ओर से फ्लाई ऐश भराव को लेकर कई शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनके तहत ऐसे स्थानों पर भराव की अनुमति है जहां जलभराव न हो और कार्य वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, ताकि भूजल और पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव न पड़े। नियमों में यह भी प्रावधान है कि एक मीटर भराव के बाद मिट्टी की परत बिछाना अनिवार्य है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर इन नियमों की अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कंपनियां लागत घटाने और अधिक लाभ के उद्देश्य से सुरक्षा मानकों की अवहेलना कर रही हैं, जिससे भविष्य में भूजल प्रदूषण और कृषि-पशुपालन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाई ऐश में मौजूद भारी धातुएं और प्रदूषक तत्व बिना वैज्ञानिक निस्तारण के लंबे समय तक खतरा पैदा कर सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन जलभरी खदानों में यह गतिविधि हो रही है, वहां अनुमति किस आधार पर दी गई और क्या स्थल निरीक्षण तथा भूजल स्थिति का सही आकलन किया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई मामलों में जमीनी वास्तविकता को नजरअंदाज कर केवल कागजी प्रक्रिया के आधार पर अनुमति जारी की गई।
खनिज विभाग और डीजीएमएस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों में सुरक्षा मानकों, चेतावनी संकेतों और बैरिकेडिंग की कमी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जिससे जोखिम और बढ़ गया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार अकलतरा क्षेत्र में 35 से अधिक खदानें हैं, जिनमें से लगभग 20 में लगातार फ्लाई ऐश डंपिंग हो रही है। प्रतिदिन हजार टन से अधिक राखड़ लाकर खदानों में डाले जाने का दावा किया जा रहा है, जिससे इस कारोबार में भारी आर्थिक लेनदेन की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कुछ खदान संचालक पुरानी खदानों को राखड़ से भरकर पूर्व खनन गतिविधियों के निशान मिटाने की कोशिश कर रहे हैं।
मामले में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच, वैज्ञानिक सर्वेक्षण और भूजल परीक्षण की मांग की है तथा नियम उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट में फंस सकता है।
क्षेत्रीय पर्यावरण मंडल बिलासपुर की अधिकारी रश्मि श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि जल से भरी खदानों में फ्लाई ऐश भराव नियमों के विरुद्ध है और यदि ऐसी गतिविधियां पाई जाती हैं तो जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई है कि पर्यावरण संरक्षण के नियम धरातल पर प्रभावी होते हैं या केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।


















