नई दिल्ली, 2 जून ।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत पर्यावरण कार्यकर्ता पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने सभी उत्पादों पर कार्बन फुटप्रिंट लेबलिंग को अनिवार्य करने की मांग उठाई है और इस संबंध में प्रधानमंत्री को ‘अभिनव पत्र’ सौंपने की तैयारी की है।
नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित “कार्बन फुटप्रिंट” विषयक गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे खाद्य और दवाओं पर पोषण एवं रासायनिक तत्वों की जानकारी दी जाती है, वैसे ही हर उत्पाद से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी भी उपभोक्ताओं तक पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और वैश्विक तापमान में वृद्धि के बीच अब यह आवश्यक हो गया है कि बाजार में उपलब्ध हर उत्पाद पर उसके कार्बन फुटप्रिंट का स्पष्ट उल्लेख किया जाए, ताकि लोग पर्यावरण अनुकूल विकल्पों का चयन कर सकें।
पर्यावरण कार्यकर्ता ने बताया कि कम ऊर्जा से निर्मित उत्पादों का कार्बन फुटप्रिंट कम होता है, जबकि औद्योगिक स्तर पर मशीनों से बने उत्पाद अधिक उत्सर्जन पैदा करते हैं, जिससे पर्यावरण पर अधिक दबाव पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण मौसम चक्र प्रभावित हो रहा है और इसका असर बाढ़ तथा सूखे जैसी स्थितियों के रूप में सामने आ रहा है।
डॉ. जोशी ने चेतावनी दी कि समुद्रों के तापमान में वृद्धि के कारण अनियंत्रित वाष्पीकरण हो रहा है, जिससे जलवायु असंतुलन और अधिक गंभीर हो रहा है तथा इसका प्रभाव धरती के बड़े हिस्से पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि इस विषय पर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार हिंदी और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों के जरिए अभियान चलाया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का रूप दिया जा सके




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