कोलकाता, 28 मई।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद इस वर्ष कोलकाता में बकरीद की नमाज को लेकर लंबे समय से चली आ रही परंपरा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
करीब 49 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज रेड रोड पर आयोजित होती रही, लेकिन इस बार इसे वहां आयोजित नहीं किया गया।
इसके स्थान पर गुरुवार को बकरीद की नमाज का आयोजन ब्रिगेड परेड मैदान में संपन्न हुआ, जिससे शहर की धार्मिक परंपरा में नया बदलाव दर्ज हुआ।
वर्ष 1977 से 2026 के बीच वाम मोर्चा सरकार से लेकर तृणमूल कांग्रेस शासन तक हर वर्ष ईद-उल-फितर और बकरीद की नमाज रेड रोड पर ही आयोजित होती रही थी।
तृणमूल कांग्रेस शासन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं भी हर वर्ष रेड रोड पर होने वाले इस आयोजन में शामिल होती थीं।
पिछले कुछ वर्षों से खुले स्थानों पर नमाज के आयोजन को लेकर यातायात अव्यवस्था और जाम जैसी समस्याएं सामने आती रही थीं, जिसके चलते इस बार प्रशासन ने सभी बड़े आयोजनों को निर्धारित मैदानों तक सीमित कर दिया।
इस वर्ष कोलकाता में कहीं भी सड़कों पर बकरीद की नमाज का आयोजन नहीं किया गया और सभी प्रमुख कार्यक्रम तय स्थानों पर ही संपन्न हुए।
बकरीद के अवसर पर कोलकाता पुलिस ने शहरभर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की और ब्रिगेड परेड मैदान तथा आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
इसके साथ ही मस्जिदों के आसपास भी सुरक्षा बढ़ाई गई और निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया गया।
सूत्रों के अनुसार, राज्य में नई नीति के तहत सार्वजनिक सड़कों पर ऐसे धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई गई है, जिनसे यातायात प्रभावित होता हो, और इस वर्ष के आयोजन में इसका स्पष्ट असर दिखाई दिया।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी रेड रोड के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय ने सुरक्षा कारणों से वैकल्पिक स्थान तलाशने को कहा था, जिसके बाद यह बदलाव और स्पष्ट हो गया।











