भुवनेश्वर, 01 जून ।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जबरन, प्रलोभन देकर अथवा धोखे से कराए जाने वाले मतांतरण को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल करने और इसके लिए प्रभावी राष्ट्रीय कानून बनाने की मांग उठाई है। परिषद का कहना है कि महिलाओं और युवतियों को निशाना बनाकर किए जाने वाले शोषण तथा अवैध मतांतरण जैसी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
भुवनेश्वर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि संगठित आपराधिक प्रवृत्तियों के माध्यम से महिलाओं के शोषण और मतांतरण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में कर त्वरित न्याय और कठोर दंड की व्यवस्था किए जाने की बात कही। साथ ही महिलाओं एवं युवतियों से जुड़े साइबर ब्लैकमेलिंग, संगठित अपराध और अवैध मतांतरण तंत्रों की जांच के लिए केंद्रीय स्तर पर विशेष अनिवार्य जांच संस्था गठित करने की मांग भी रखी।
परिषद की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक में महिला सुरक्षा एवं अवैध मतांतरण, शिक्षा सुधार, शहरी माओवाद और वैश्विक परिदृश्य से जुड़े कुल चार प्रस्ताव पारित किए गए। महिला सुरक्षा संबंधी प्रस्ताव में छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाने, आत्मरक्षा प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करने और व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया।
शिक्षा सुधारों पर परिषद ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, नीट, सीयूईटी तथा अन्य सुधारों की दिशा सकारात्मक है, लेकिन क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों के कारण अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। परिषद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर नियंत्रण, विश्वविद्यालयों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय तथा गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
शहरी माओवाद पर पारित प्रस्ताव में इसे देश के समक्ष उभरती गंभीर चुनौती बताया गया। परिषद का मत है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई से सशस्त्र माओवादी गतिविधियां कमजोर हुई हैं, लेकिन उनकी वैचारिक गतिविधियां विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक संस्थानों और डिजिटल मंचों के माध्यम से प्रभाव बनाए रखने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे तत्वों की पहचान और प्रभावी प्रतिरोध की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
वैश्विक परिदृश्य से जुड़े प्रस्ताव में रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति की सराहना की गई। परिषद ने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता, आर्थिक सुदृढ़ता और बहुपक्षीय कूटनीति के आधार पर भारत विश्व स्तर पर जिम्मेदार शक्ति के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। साथ ही युवाओं से स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया।










