नई दिल्ली, 01 जून ।
भारत और म्यांमार ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में सुरक्षा, व्यापार, बुनियादी ढांचा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा की। इस दौरान म्यांमार ने आश्वस्त किया कि उसकी धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। वहीं भारत ने भी म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच सोमवार को हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि राष्ट्रपति ह्लाइंग 30 मई से 3 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा है और इसके लिए उन्होंने भारत को चुना है।
उन्होंने कहा कि भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है तथा दोनों देशों के संबंध पड़ोसी प्रथम, एक्ट ईस्ट, महासागर और हिन्द-प्रशांत नीतियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आए हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने बोधगया में महाबोधि मंदिर, महाबोधि धम्मैखा मठ और सुजाता मंदिर का भी दर्शन किया, जो दोनों देशों के गहरे बौद्ध एवं सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।
रविवार को राष्ट्रपति ह्लाइंग ने भारत-म्यांमार बिजनेस कॉन्क्लेव में भाग लिया, जहां व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार में भारत का निर्यात 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक और म्यांमार का निर्यात 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र का भी दौरा किया, जबकि मंगलवार को उनके मुंबई प्रवास का कार्यक्रम है।
विदेश सचिव ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय हालात समेत विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तथा अन्य उन्नत प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी दोनों पक्षों ने व्यक्त की।
बैठक में संपर्क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना तथा भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के कालेवा-यागी खंड को शीघ्र पूरा करने की दिशा में कार्य तेज करने पर सहमति जताई।
सुरक्षा सहयोग पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन को दोहराया। दोनों पक्षों ने इस बात पर बल दिया कि किसी भी देश की भूमि का उपयोग दूसरे देश के सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए। म्यांमार के राष्ट्रपति ने पुनः भरोसा दिलाया कि उनके देश की भूमि का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा संसाधनों के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस दिशा में सरकारी एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने और संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर विदेश सचिव ने बताया कि म्यांमार में फंसे भारतीयों की वापसी के लिए दोनों देश लगातार समन्वय कर रहे हैं। अब तक 2,411 भारतीयों को वापस लाया जा चुका है, जबकि 150 से अधिक लोगों के अभी भी वहां फंसे होने की जानकारी है। शेष लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास जारी हैं।
वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति और राष्ट्रीय मेलमिलाप की प्रक्रिया की जानकारी भी ली। उन्होंने समावेशी और विकासोन्मुख म्यांमार के प्रति भारत का समर्थन व्यक्त किया। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में अशांति, शरण लेने वाले समुदायों और उससे उत्पन्न चुनौतियों को लेकर भारत की चिंताओं से भी अवगत कराया तथा म्यांमार में स्थायी शांति और स्थिरता की कामना की।











