नई दिल्ली, 02 जून ।
भारत ने मंगलवार को कहा कि बांग्लादेश के साथ साझा नदियों से जुड़े मामलों के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच पहले से ही एक व्यवस्थित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि गंगा जल बंटवारा समझौते से जुड़े मुद्दों पर भी इसी स्थापित व्यवस्था के तहत विचार किया जाएगा।
साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां साझा हैं। इन नदियों से जुड़े विषयों पर चर्चा और समन्वय के लिए संयुक्त नदी आयोग का गठन किया गया है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रमुख मंच है।
उन्होंने कहा कि साझा नदियों से संबंधित सभी विषयों पर संरचित द्विपक्षीय सहयोग की प्रक्रिया के तहत विचार किया जाता है और भविष्य में भी इसी व्यवस्था के माध्यम से आवश्यक मुद्दों पर चर्चा जारी रहेगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने गंगा जल बंटवारा समझौते के नवीनीकरण को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा था कि भारत और बांग्लादेश के मजबूत संबंधों के लिए इस समझौते का नवीनीकरण अहम रहेगा।
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्तमान गंगा जल बंटवारा संधि वर्ष 1996 में हस्ताक्षरित हुई थी। यह समझौता 30 वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया था और इसका उद्देश्य शुष्क मौसम के दौरान गंगा के जल का साझा उपयोग सुनिश्चित करना था। इस संधि की अवधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है।
समझौते के तहत फरक्का क्षेत्र में जल प्रवाह के आधार पर दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसके क्रियान्वयन और विवादों के समाधान की जिम्मेदारी एक संयुक्त समिति को सौंपी गई है।
पिछले वर्षों में जलवायु परिवर्तन, हिमनदों के पिघलने और ऊपरी क्षेत्रों में जल उपयोग बढ़ने जैसी परिस्थितियों ने शुष्क मौसम में नदी के जल प्रवाह को प्रभावित किया है। इस कारण जल आवंटन को लेकर समय-समय पर चुनौतियां सामने आती रही हैं।
गंगा जल समझौते की अवधि समाप्त होने के करीब पहुंचने के साथ इसका नवीनीकरण भारत-बांग्लादेश संबंधों के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल माना जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच औपचारिक चर्चा होने की संभावना है।










