नई दिल्ली, 4 जून ।
किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार के उद्देश्य से तैयार किया गया विशेष कृषि रोडमैप अब क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके तहत मध्यप्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों को कृषि परिवर्तन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर इस रोडमैप की समीक्षा नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की गई, जिसमें मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह रोडमैप केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने, जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने वाला एक मिशन है, जिसकी सफलता का आधार सीधे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास को ऐसे कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिन्हें बाद में देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां भूजल स्तर में गिरावट और मिट्टी की गुणवत्ता जैसी चुनौतियां सामने हैं।
अल नीनो और संभावित जल संकट को देखते हुए उन्होंने रबी फसलों की सुरक्षा के लिए अग्रिम रणनीति तैयार करने पर जोर दिया और कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी किसानों की आय सुरक्षित रखना वैज्ञानिक खेती के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
बैठक में ‘वन टीम, वन टॉस्क’ के सिद्धांत पर काम करने पर बल दिया गया और स्पष्ट किया गया कि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी और समयसीमा तय कर योजनाओं का वास्तविक परिणाम खेतों में दिखना चाहिए, न कि केवल प्रशासनिक दस्तावेजों तक सीमित रहना चाहिए।
शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न कृषि योजनाओं के एकीकृत क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि सिंचाई, खाद्य सुरक्षा, तिलहन मिशन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का संयुक्त प्रभाव सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचना चाहिए।
बैठक में जिलेवार कृषि मॉडल के तहत सोयाबीन-मक्का, धान-लहसुन और मक्का-लहसुन-प्याज जैसी फसल प्रणालियों को बढ़ावा देने की प्रगति की समीक्षा की गई, साथ ही खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले में एक ब्लॉक में समेकित कृषि प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया।
इसके अलावा किसान उत्पादक संगठनों को बाजार से जोड़ने, बागवानी क्षेत्र में नर्सरी और कोल्ड चेन विकास, तथा कृषि प्रशिक्षण और तकनीकी संस्थानों की भूमिका बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर अवसर मिल सकें।










