संपादकीय
05 Jun, 2026

महाराष्ट्र मॉडल बंगाल में: क्या तृणमूल पर मंडरा रहा है टूट का खतरा?

महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक विभाजन मॉडल की चर्चा के बीच पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित टूट और नेतृत्व संकट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

कोलकाता, 5 जून।

महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के विभाजन के बाद अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी वैसी ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता रिजू दत्ता और कुछ विधायकों ने दावा किया है कि पार्टी के 80 में से 50 से अधिक विधायक उनके साथ हैं और वे ही 'असली तृणमूल कांग्रेस' का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दावे ने बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

महाराष्ट्र में पहले एकनाथ शिंदे ने शिवसेना में बगावत कर पार्टी और चुनाव चिन्ह पर अधिकार प्राप्त किया था। इसके बाद अजित पवार ने एनसीपी में विभाजन कर संगठन और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा मजबूत किया। दोनों मामलों में संख्या बल निर्णायक साबित हुआ। दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी गुट को दो-तिहाई विधायकों का समर्थन हासिल करना आवश्यक होता है।

तृणमूल कांग्रेस के मामले में यह आंकड़ा 54 विधायकों का बनता है। बागी गुट फिलहाल 50 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है, लेकिन अभी तक दो-तिहाई बहुमत का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। यही कारण है कि स्थिति अभी चर्चा के स्तर पर अधिक और कानूनी रूप से कम मजबूत दिखाई देती है।

ममता बनर्जी के लिए यह चुनौती केवल विधायकों की संख्या की नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता की भी है। तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से ममता-केंद्रित दल रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि, अभी भी बंगाल में ममता बनर्जी का जनाधार मजबूत माना जाता है और तृणमूल की पहचान काफी हद तक उनके नेतृत्व से जुड़ी हुई है।

बंगाल और महाराष्ट्र की परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण अंतर यह भी है कि महाराष्ट्र में सरकार गठबंधन की थी, जबकि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है। ऐसे में, संभावित विभाजन का सीधा असर सरकार पर पड़ने की संभावना कम दिखाई देती है। लड़ाई मुख्य रूप से पार्टी संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर हो सकती है।

अंततः इस पूरे विवाद की दिशा विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग के निर्णय से तय होगी। फिलहाल बागी गुट का दावा राजनीतिक दबाव तो बना रहा है, लेकिन उसे कानूनी मजबूती मिलने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाना होगा। इसलिए, अभी इसे एक राजनीतिक चेतावनी माना जा सकता है, निर्णायक संकट नहीं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बंगाल महाराष्ट्र की राह पर चलता है या तृणमूल अपनी एकजुटता बनाए रखने में सफल रहती है।

|
आज का राशिफल

मेष- कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। यार-दोस्तों के साथ सांझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्धिमानी होगी। आपकी योजना से लोग प्रभावित होंगे। शुभांक-3-5-7

आज का मौसम

भोपाल

25° / 33°

Scattered thunderstorms

ट्रेंडिंग न्यूज़