नई दिल्ली, 05 जून ।
ईरान ने अपने सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह के प्रति समर्थन दोहराते हुए दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग की है। इस बयान ने क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने के प्रयासों और संभावित शांति समझौते को लेकर नई जटिलताएं पैदा कर दी हैं।
ईरान का कहना है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी व्यापक समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम आवश्यक है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने के लिए भी क्षेत्र में स्थायी शांति जरूरी बताई गई है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक साक्षात्कार में कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष का अंत तभी माना जाएगा जब लेबनान में भी लड़ाई पूरी तरह समाप्त हो और वहां से इजरायली बलों की वापसी हो।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। संगठन का कहना है कि प्रस्ताव में इजरायली सेना की वापसी का प्रावधान नहीं है और वार्ता प्रक्रिया में उसे शामिल भी नहीं किया गया था।
इस बीच दक्षिणी लेबनान में सैन्य गतिविधियां जारी हैं। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अभियान को रोकने या क्षेत्र से तत्काल हटने के पक्ष में नहीं है। दूसरी ओर ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सलाहकारों ने भी हिजबुल्लाह को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए उसके प्रति प्रतिबद्धता दोहराई है।
क्षेत्रीय तनाव का असर ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला समुद्री व्यापार अभी भी सामान्य स्तर से काफी नीचे बना हुआ है। वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी संघर्ष का प्रभाव पड़ रहा है।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम तथा व्यापक समझौते को लेकर संपर्क जारी है। प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत कई जटिल मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए छोड़े जाने की संभावना है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय अब भी बातचीत के केंद्र में बने हुए हैं।








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