नई दिल्ली, 5 जून ।
मालवीय नगर अग्निकांड जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शहरी विकास एवं गृह मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली गतिविधियों पर अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि लापरवाह और भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान भी शामिल है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कठोर कार्रवाई की संभावना पर विचार किया गया।
सरकार ने यह भी तय किया कि सरकारी नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन और संपत्ति से की जाएगी। वहीं बिल्डरों, मालिकों और कॉलोनाइजरों की संपत्ति को फ्रीज और अटैच करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही को और कठोर बनाने के लिए उनके वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन में नकारात्मक प्रविष्टि दर्ज करने का निर्देश दिया गया। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई।
प्रशासनिक सुधार के तहत जिला मजिस्ट्रेटों की शक्तियों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जिससे वे अपने क्षेत्र में अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, एफआईआर दर्ज कराने और प्रशासनिक नियंत्रण जैसी शक्तियों का उपयोग कर सकेंगे।
सरकार ने भवन निर्माण विभागों में अधिकारियों के स्थानांतरण नियमों को भी सख्त करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।
इसके अलावा थर्ड पार्टी इंश्योरेंस व्यवस्था लागू करने, दमकल विभाग की प्रतिक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और ड्रोन सर्वे व सैटेलाइट इमेजरी के जरिए निगरानी प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध निर्माण और बिना अनुमति संचालित भवनों की जांच के लिए संयुक्त समितियां गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने और तत्काल सीलिंग कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा उल्लंघन के मामलों में किसी भी तरह की देरी या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा सुधार का यह अंतिम अवसर है।








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