इंदौर, 02 नवंबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों से मिले अनुभवों के आधार पर आगामी कार्ययोजना तैयार करने के लिए संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक सोमवार को इंदौर में शुरू हुई। बैठक में पंच परिवर्तन को सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने और देशभर में शाखाओं के विस्तार को गति देने पर भी विचार किया जा रहा है।
डेली कॉलेज के संत श्री रविदास महाराज सभागार में आयोजित बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में शुरू हुई बैठक चार नवंबर की शाम तक चलेगी। इसमें विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक हुए शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ आगे की दिशा तय की जाएगी।
शताब्दी वर्ष के आयोजनों की समीक्षा और आगे की कार्ययोजना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने बैठक और प्रदर्शनी की जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा केवल शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के आकलन तक सीमित नहीं रहेगी। आयोजनों के प्रभाव, समाज के विभिन्न वर्गों तक उनकी पहुंच और भविष्य में किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा पर भी विचार होगा।
बैठक में यह तय करने पर जोर रहेगा कि स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज तक पहुंचे विचारों और गतिविधियों को आगे कैसे जारी रखा जाए। कार्यक्रमों के अनुवर्तन, उनके सामाजिक प्रभाव और विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए प्रभावी कार्यपद्धति विकसित करने पर भी चर्चा होगी।
शाखाओं के विस्तार के साथ सुदृढ़ीकरण पर जोर
बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान हुए शाखा विस्तार की समीक्षा भी प्रमुख विषय है। संघ की संगठनात्मक व्यवस्था में शाखा की अहम भूमिका को देखते हुए नई जगहों पर शाखाएं शुरू करने के साथ मौजूदा और हाल में विस्तारित शाखाओं को अधिक नियमित, सक्रिय और प्रभावी बनाने पर विचार किया जाएगा।
शाखाओं की नियमितता, कार्य की गुणवत्ता और संगठनात्मक मजबूती बढ़ाने के उपायों पर चर्चा होगी। देश के अधिक से अधिक स्थानों पर शाखाएं शुरू करने के लिए आवश्यक प्रयासों पर भी मंथन किया जाएगा।
इसके साथ ही समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बढ़ाने और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाने पर विचार होगा। पंच परिवर्तन से जुड़े विषयों को सामाजिक सहभागिता के जरिए व्यापक बनाने और इन प्रयासों को निरंतर जारी रखने की व्यवस्था पर भी चर्चा की जाएगी।
विजयादशमी उद्बोधन के विषयों पर भी मंथन
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के विजयादशमी उद्बोधन में उठाए गए राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर भी बैठक में विचार होगा। इन विषयों को समाज तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने और उनसे जुड़ी आगामी गतिविधियों की योजना बनाने पर चर्चा की जाएगी।
संघ के लिए विजयादशमी उद्बोधन संगठन के विचारों, सामाजिक प्राथमिकताओं और समसामयिक विषयों पर दृष्टिकोण सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। बैठक में उद्बोधन के विषयों के सामाजिक संदर्भ और उनके अनुरूप आगे किए जाने वाले कार्यों पर विचार किया जाएगा।
देश के सभी 46 प्रांतों के प्रतिनिधि शामिल
बैठक में संघ के राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय संगठनात्मक ढांचे के पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह और अखिल भारतीय पदाधिकारी उपस्थित हैं।
संघ के सभी 11 क्षेत्रों के क्षेत्र संघचालक, क्षेत्र कार्यवाह और क्षेत्र प्रचारक भी बैठक में शामिल हैं। इसके अलावा सभी 46 प्रांतों के प्रांत संघचालक, प्रांत कार्यवाह, प्रांत प्रचारक और उनके सहयोगी कार्यकर्ता पहुंचे हैं। संघ से प्रेरित कुछ विविध संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री और सह संगठन मंत्री भी आमंत्रित किए गए हैं।
बैठक के जरिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर के पदाधिकारियों को संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना पर साझा चर्चा का अवसर मिला है। बैठक का शुभारंभ डॉ. मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया।
तीन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर सरकार्यवाह के वक्तव्य
बैठक के दौरान सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले तीन ऐतिहासिक और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के जीवन तथा योगदान पर वक्तव्य जारी करेंगे। इनमें राष्ट्रीय चेतना के पुरोधा राजनारायण बोस, शुद्धिकरण आंदोलन के प्रमुख व्यक्तित्व स्वामी श्रद्धानंद और ओडिशा के कंधमाल क्षेत्र में जनजातीय समाज के बीच कार्य करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती शामिल हैं।
राजनारायण बोस की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन और राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया जाएगा। स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100वें वर्ष पर उनके जीवन, कार्य और सामाजिक तथा धार्मिक योगदान से जुड़े पहलुओं पर वक्तव्य जारी होगा।
ओडिशा के कंधमाल जनजातीय क्षेत्र में स्वाभिमान, स्वावलंबन और स्वधर्म की जागृति के लिए जीवन समर्पित करने वाले स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जन्म शताब्दी वर्ष पर भी सरकार्यवाह का वक्तव्य जारी किया जाएगा। इन तीनों वक्तव्यों के संबंध में संघ की ओर से मीडिया प्रतिनिधियों को समय-समय पर जानकारी दी जाएगी।
दिवंगत हस्तियों और कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि
बैठक के प्रारंभ में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पिछले कुछ महीनों में दिवंगत हुईं और हुए समाज की प्रमुख हस्तियों तथा कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी। इनमें फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर, गायिका आशा भोंसले, संत पद्मश्री रमेश बाबा, विवेकानंद केंद्र के पूर्व अध्यक्ष बालकृष्ण जी और बलवीर पुंज शामिल हैं।
इसके अलावा चेन्नई के एस. वेदांतम्, पत्रकार विराग पाचपोर, मुंबई के पराग वेदिक, पूर्व कुलपति देवेंद्र प्रताप सिंह, सच्चिदानन्द महंती, गायिका एस. जानकी और सुमन कल्याणपुरीकर तथा संघ के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार सहित अन्य दिवंगत व्यक्तित्वों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संघ की सौ साल की यात्रा पर प्रदर्शनी
बैठक स्थल पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा और मालवा क्षेत्र में संघ कार्य के विकास को दर्शाने वाली विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें संघ की शताब्दी यात्रा और क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों के क्रमिक विस्तार से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित की गई है।
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 31 अक्टूबर को प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। सोमवार से इसे मीडिया प्रतिनिधियों के अवलोकन के लिए भी उपलब्ध कराया गया है। प्रदर्शनी के जरिए संघ की ऐतिहासिक यात्रा और मालवा क्षेत्र में उसके कार्य के विकास को समझने का अवसर मिलेगा।















