इंदौर, 02 नवंबर।
काले हिरण और चिंकारा के शिकार तथा अंतरराज्यीय तस्करी के मामले में आरोपी रिजवान को राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की क्षेत्रीय इकाई इंदौर ने इसे वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव के निर्देश पर एसटीएफ, स्थानीय पुलिस और वन मंडल इंदौर ने किशनगंज क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई की थी। मौके से करीब 65 किलोग्राम वन्यजीव मांस, एक देशी पिस्तौल, तीन कारतूस और तस्करी में इस्तेमाल टोयोटा इनोवा क्रिस्टा वाहन जब्त कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में 3 दिसंबर 2024 को वन अपराध दर्ज हुआ।
गिरोह के व्यापक नेटवर्क को देखते हुए आगे की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच में मध्यप्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों में वन और गैर-वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के संबंध सामने आए। रिजवान को 4 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर वन्यजीवों के सींग, एक राइफल और 20 कारतूस बरामद हुए। अब तक गिरोह के छह आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
अदालत ने मामले में प्रस्तुत दलीलों, बयानों, वैज्ञानिक तथ्यों, आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता पर विचार करते हुए जमानत देने से इनकार किया। एसटीएफ ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।















