जबलपुर, 3 नवंबर।
सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुए 40 वर्षीय नरेंद्र रजक अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंग पांच मरीजों को नया जीवन देने में मदद करेंगे। गहरे दुख के बीच पत्नी पूजा रजक और परिवार ने अंगदान की सहमति देकर दूसरों के लिए उम्मीद की मिसाल पेश की। इसके बाद प्रशासन ने रात में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को संबंधित अस्पतालों और एयरपोर्ट तक पहुंचाया।
मेट्रो प्राइम अस्पताल के प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. राजेश पटेल के अनुसार, नरेंद्र की दोनों किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा दान की गई। जांच में उनका हृदय प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया, इसलिए उसका उपयोग नहीं हो सका।
एक किडनी मेट्रो प्राइम अस्पताल में मरीज को लगाई जाएगी और दूसरी मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजी गई। लिवर को चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद के मरेन्गो सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया।
अहमदाबाद से पहुंची चिकित्सकीय टीम
अंग लेने के लिए अहमदाबाद से पांच सदस्यीय डॉक्टरों का दल चार्टर्ड विमान से जबलपुर आया था। इसमें हृदय रोग सर्जन डॉ. निकुंज व्यास, लिवर प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. विकास पटेल, हृदय रोग एनेस्थेटिस्ट डॉ. चिंता सेठ और दो स्टाफ नर्स शामिल थीं। लिवर और हृदय को अहमदाबाद ले जाने की योजना थी, लेकिन जांच में हृदय प्रत्यारोपण के योग्य नहीं मिला।
रात में बनाए गए दो ग्रीन कॉरिडोर
अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने दो विशेष मार्ग तैयार किए। पहला ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो प्राइम अस्पताल से अब्दुल हमीद चौक होते हुए डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया। दूसरा मार्ग अस्पताल से रानी दुर्गावती फ्लाईओवर होते हुए मेडिकल कॉलेज तक तैयार किया गया। पुलिस की निगरानी में एंबुलेंस को बिना यातायात बाधा के निकाला गया।
रात में जबलपुर एयरपोर्ट बंद होने के बावजूद विशेष अनुमति लेकर विमान की नाइट लैंडिंग और संचालन की व्यवस्था की गई। सुबह करीब चार बजे लिवर को चिकित्सकीय सुरक्षा के साथ एंबुलेंस से एयरपोर्ट पहुंचाया गया। अस्पताल परिसर में मोमबत्तियां जलाकर परिवार के फैसले को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद लिवर चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद रवाना किया गया। करीब 4:30 बजे दूसरी एंबुलेंस से किडनी मेडिकल कॉलेज भेजी गई।
हादसे में गई जान, अंगदान से मिली दूसरों को उम्मीद
गंगानगर की नव निवेश कॉलोनी निवासी नरेंद्र रजक एचसीएल कंपनी में काम करते थे। परिवार के अनुसार, 31 दिसंबर को वे अपने साले की मृत्यु के बाद गंगा पूजन के लिए कुआंखेड़ा गए थे। आमतौर पर हेलमेट पहनने वाले नरेंद्र हादसे के दिन बिना हेलमेट निकले थे। घर लौटते समय अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
गंभीर हालत में उन्हें मेट्रो प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के बाद भी उनकी स्थिति नहीं सुधरी। चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
पत्नी ने कहा- इससे बड़ा कोई दान नहीं
अंगदान का निर्णय लेते समय पत्नी पूजा रजक और दोनों बच्चे भावुक हो गए। पूजा ने कहा कि परिवार ने अपने प्रियजन को खो दिया है, लेकिन अंगदान से दूसरे परिवारों को अपने मरीजों के बचने की आशा मिल सकती है।
उन्होंने ब्रेन डेड घोषित हुए मरीजों के परिजनों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की और कहा कि इससे बड़ा कोई दान नहीं है।















