नेपीडॉ, 11 मई।
भारत ने म्यांमार के राजधानी नेपीडॉ में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन से जुड़े 30 अधिकारियों के लिए दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। यह प्रशिक्षण शांति स्थापना अभियानों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
नई दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र की तीन सदस्यीय टीम इस प्रशिक्षण का संचालन कर रही है। यह भारत और म्यांमार के बीच आयोजित नौवां संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें अधिकारियों को शांति अभियानों की आधुनिक तकनीकों और प्रक्रियाओं से अवगत कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर भारत के राजदूत ने मानवतावादी मिशनों में भारत की भूमिका और वैश्विक स्थिरता में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से शांति स्थापना अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाता आ रहा है और यह साझेदारी दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है।
इस दौरान यह भी बताया गया कि भारत और म्यांमार के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से गहरे और महत्वपूर्ण हैं। यह सहयोग दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं को और मजबूत करता है।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें अधिकारियों को संघर्ष प्रबंधन, तनाव कम करने की तकनीक और जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित कराई जा सके।
इसके अलावा नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के पालन पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि शांति अभियानों में शामिल अधिकारी संवेदनशील परिस्थितियों में बेहतर तरीके से कार्य कर सकें।
पाठ्यक्रम में जटिल शांति मिशन वातावरण में संचालन योजना और उसके क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को भी शामिल किया गया है, जिससे अधिकारी विभिन्न परिस्थितियों में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
भारत वर्ष 1950 से लगातार वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान दे रहा है और अब तक बड़ी संख्या में शांति सैनिक विभिन्न मिशनों में सेवाएं दे चुके हैं। भारत को संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में एक प्रमुख योगदानकर्ता माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्र का गठन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के संयुक्त प्रयास से किया गया है। भारत न केवल सैनिक योगदान देता है, बल्कि शांति स्थापना से जुड़े विचार-विमर्श और नीतिगत विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।






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