तेल अवीव, 11 मई।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की मौजूदा राजनीतिक और सैन्य स्थिति को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ईरान इस समय आंतरिक मतभेदों और कमजोर शासन व्यवस्था के दौर से गुजर रहा है।
नेतन्याहू के अनुसार ईरान के कथित नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई जीवित हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ पहले की तुलना में कमजोर है। उन्होंने दावा किया कि वे फिलहाल किसी सुरक्षित स्थान या बंकर में रहकर शासन संचालन की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देश के भीतर उनकी स्वीकार्यता सीमित है।
इजराइली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ईरान 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच गया है और वहां सत्ता संरचना के भीतर गंभीर मतभेद और विभाजन की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार एक पक्ष संघर्ष जारी रखना चाहता है, जबकि दूसरा पक्ष आर्थिक संकट और जनविरोध को देखते हुए समझौते की राह पर विचार कर रहा है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के सामने सबसे बड़ा खतरा बाहरी ताकतों से नहीं, बल्कि भीतर बढ़ते जनअसंतोष से है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हुए विरोध प्रदर्शनों ने शासन की नींव को कमजोर किया है और आर्थिक संकट, महंगाई तथा असंतोष ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सैन्य क्षमता को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल ढांचे को हालिया घटनाओं में नुकसान पहुंचा है, जिससे उसकी सैन्य ताकत प्रभावित हुई है। उनके अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो ईरान जल्द ही परमाणु हथियार विकसित कर सकता था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के कमजोर होने का असर हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों पर भी पड़ेगा, क्योंकि वे ईरानी समर्थन पर निर्भर हैं और उनकी सैन्य क्षमता पहले ही काफी कम हो चुकी है।
अंत में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल आने वाले समय में अमेरिका के साथ अपने सहयोग को और मजबूत करेगा, हालांकि देश सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।






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