राजनीति
11 Apr, 2026

कंदकुर्ती में ‘केशव स्फूर्ति मंदिर’ का लोकार्पण, मोहन भागवत बोले- बनेगा प्रेरणा केंद्र

कंदकुर्ती गांव में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की स्मृति में बने ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का लोकार्पण करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने इसे राष्ट्रभक्ति और प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बताया, जहां उनके जीवन और विरासत को संरक्षित कर भावी पीढ़ियों को प्रेरित करने का संदेश दिया गया है।

हैदराबाद, 11 अप्रैल 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के पैतृक गांव कंदकुर्ती में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ का लोकार्पण किया। यह गांव तेलंगाना राज्य के निजामाबाद जिले में स्थित है। यह स्फूर्ति मंदिर डॉ. हेडगेवार के जीवन, दृष्टि और उनकी विरासत को प्रेरणा तथा स्मारक के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

भूतल पर डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके साथ उनके जीवन के महत्वपूर्ण चरणों और राष्ट्र पुनर्निर्माण के उनके दृष्टिकोण को दर्शाने वाली फोटो गैलरी भी बनाई गई है। प्रथम तल पर भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है, जबकि एक वीडियो प्रस्तुति हॉल में उनके जीवन और वैचारिक यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा ‘संग्रहालय’ हॉल में उनके द्वारा उपयोग की गई व्यक्तिगत वस्तुएं, हस्तलिखित पत्रों की प्रतियां तथा उनके जीवन से जुड़ी दुर्लभ पुस्तकें रखी गई हैं। भारत माता और डॉ. हेडगेवार की प्रतिमाएं मैसूर के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगिराज ने तैयार की हैं, जिन्होंने अयोध्या में रामलला की मूर्ति भी निर्मित की थी।

इस अवसर पर सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि यह स्मृति मंदिर श्रद्धा केंद्र के रूप में विकसित होकर स्वयंसेवकों और आगंतुकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्थान बनेगा। उन्होंने कहा कि कंदकुर्ती से देशभक्ति, निस्वार्थ जीवन और समाज को अभाव से मुक्त करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। उन्होंने लोगों से इस स्थान के बारे में अधिक से अधिक जानकारी साझा करने, बार-बार आने और यहां की मिट्टी से प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. भागवत ने कई महानुभावों को सम्मानित भी किया जिनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। यात्रा के दौरान उन्होंने गांव के केशव मूर्ति, रुक्मिणी समेत विठ्ठलेश्वर और स्कंद मंदिरों के दर्शन भी किए।

कंदकुर्ती गांव गोदावरी, मंजिरा और हरिद्रा नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह गांव हैदराबाद से लगभग 210 किलोमीटर तथा नागपुर से लगभग 380 किलोमीटर दूर स्थित है। प्राचीन काल में इसे ‘स्कंदपुरी’ के नाम से जाना जाता था, जिसका संबंध भगवान सुब्रमण्य (स्कंद) से माना जाता है। मान्यता है कि त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने इस क्षेत्र का भ्रमण किया था और छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी यहां की यात्राएं की थीं। गांव में डॉ. हेडगेवार के कुलदेवता केशव स्वामी का मंदिर स्थित है तथा हाल ही में प्राचीन स्कंद मंदिर का पुनर्निर्माण भी किया गया है। अप्रैल 2025 में यहां श्री विघ्नेश्वर, श्री सुब्रमण्यम स्वामी, श्री रुक्मिणी समेत विठ्ठलेश्वर और श्री केशव स्वामी मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई थी।

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