उत्तर प्रदेश
11 Apr, 2026

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला सशक्तीकरण की ऐतिहासिक पहल, विकसित भारत की मजबूत नींव

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला एवं बाल विकास मंत्री ने लोकतंत्र में ऐतिहासिक सुधार बताते हुए इसे सशक्त भारत और महिला नेतृत्व की दिशा में निर्णायक कदम करार दिया।

लखनऊ, 11 अप्रैल 2026।

महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भाजपा की वरिष्ठ नेता बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी निर्णय बताया।

उन्होंने कहा कि यह अधिनियम देश की करोड़ों माताओं और बहनों के सम्मान का राष्ट्रीय संकल्प है तथा यह भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की मजबूत नींव है। यह व्यवस्था महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार और निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार द्वारा लागू यह कानून देश की करोड़ों महिलाओं, माताओं और बेटियों के अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करने का राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला यह संवैधानिक संशोधन लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावशाली बनाएगा।

मंत्री ने कहा कि देश में महिलाएं मतदान और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अब भी अपेक्षाकृत कम है। भागीदारी बढ़ी है, परंतु प्रतिनिधित्व का संतुलन अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाया है, जिसे दूर करने के लिए यह कानून अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक और राष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं तो नीतियां अधिक संवेदनशील बनती हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पोषण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विभिन्न अध्ययनों में यह भी स्पष्ट हुआ है कि लैंगिक अंतर कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

पिछले दस वर्षों में महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं और विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ उन्हें मिला। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन तथा मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है।

उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर लगभग छियालीस प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं। अब यही मॉडल संसद और विधानसभाओं में भी लागू किया जाएगा, जिससे नीति निर्माण अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” केवल आरक्षण का प्रावधान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक व्यापक सुधार है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है। उन्होंने कहा कि जब नारी सशक्त होती है तो समाज सशक्त होता है और जब समाज सशक्त होता है तो राष्ट्र मजबूत बनता है।

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