लेह, 29 अप्रैल।
आध्यात्मिक श्रद्धा और भक्तिभाव के वातावरण के बीच तथागत बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेष बुधवार को लेह पहुंचे, जिसके साथ ही केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक आयोजन की शुरुआत हो गई। यह पवित्र अवशेष 2 से 10 मई तक आम श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु उपलब्ध रहेंगे, इसके बाद 11 और 12 मई को ज़ांस्कर में तथा 13 से 14 मई तक लेह के धर्म केंद्र में दर्शन के लिए रखे जाएंगे और अंततः 15 मई को इन्हें दिल्ली वापस ले जाया जाएगा।
नई दिल्ली में संरक्षित इन पवित्र अवशेषों का लेह हवाई अड्डे पर लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा गहरी श्रद्धा के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर पारंपरिक प्रस्तुतियां, औपचारिक सम्मान और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जहां द्रुकपा थुकसे रिनपोचे और माथो मठ के खेनपो थिनलास चोसल विशेष विमान से अवशेषों को लेकर पहुंचे।
स्वागत समारोह में खामतक रिनपोचे, रिग्याल रिनपोचे, लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित अनेक धार्मिक एवं सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं। इसके अलावा दोरजे स्टैनज़िन, लद्दाख बौद्ध संघ के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक, पूर्व सांसद थुपस्टन चेवांग और जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त लेह ताशी ग्यालसन तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
इस दौरान लद्दाख पुलिस द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया और भिक्षुओं ने विशेष प्रार्थनाएं कीं। उपराज्यपाल ने प्रदेश की जनता की ओर से श्रद्धा व्यक्त करते हुए सभी के लिए शांति एवं कल्याण की कामना की। इसके पश्चात अवशेषों को भव्य जुलूस के माध्यम से जीवत्सल ले जाया गया, जहां 1 मई से इन्हें सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाएगा, जो 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा का अवसर भी है।
इस आयोजन में पूरे लद्दाख से भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली, जो एकता, आस्था और सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक बनी। हजारों लोग पारंपरिक परिधानों में मार्ग पर कतारबद्ध होकर पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए पहुंचे।
उपराज्यपाल ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहा कि पवित्र अवशेषों के आगमन से संपूर्ण क्षेत्र आशीर्वादित हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यद्यपि इन अवशेषों को पूर्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया गया है, परंतु यह पहली बार है जब इन्हें भारत में इनके मूल संरक्षण स्थल से बाहर लाकर प्रदर्शित किया जा रहा है।
उन्होंने इस आयोजन के लिए लद्दाख को चुने जाने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया और क्षेत्र के बौद्ध धर्म एवं आध्यात्मिक परंपरा से गहरे जुड़ाव को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने जनता से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया।
पूर्व वर्षों में पिपरावा अवशेषों का प्रदर्शन थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार सहित अनेक देशों में किया जा चुका है, जिससे वैश्विक स्तर पर इसकी आस्था और महत्व और अधिक बढ़ा है। लद्दाख में ये अवशेष 2 से 10 मई तक जीवत्सल में, 11 और 12 मई को ज़ांस्कर में तथा 13 से 14 मई तक लेह के धर्म केंद्र में दर्शनार्थ रखे जाएंगे, जिसके बाद 15 मई को इन्हें वापस दिल्ली ले जाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री सहित कई केंद्रीय मंत्री, विभिन्न देशों के राजदूत, बौद्ध बहुल राज्यों के मुख्यमंत्री और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधि भी दर्शन हेतु लेह पहुंचेंगे। 127 वर्षों तक औपनिवेशिक संरक्षण में रहने के बाद जुलाई 2025 में यह पवित्र संग्रह भारत वापस लाया गया था, जिसमें रत्न और भेंट भी शामिल थे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए उपराज्यपाल स्वयं तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं।










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