मध्य प्रदेश
15 Apr, 2026

मध्य प्रदेश में राज्यसभा सीटों पर सियासी हलचल तेज

मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है, विधायकों के गणित, क्रॉस वोटिंग, रिक्तियों और केंद्रीय नेताओं के संभावित बदलाव से सत्ता समीकरण बदलने की स्थिति बन रही है।

भोपाल, 15 अप्रैल।

केरल और तमिलनाडु की दो लोकसभा सीटों पर होने वाले मतदान के परिणाम मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकते हैं, हालांकि यह राज्य दक्षिण भारत से करीब 2,000 किलोमीटर दूर स्थित है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा के दो सदस्य और केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन तथा जॉर्ज कुरियन क्रमशः तमिलनाडु और केरल से चुनावी मैदान में हैं। उनके परिणाम राज्य में राज्यसभा सीटों के खाली होने की स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिससे राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

मध्य प्रदेश में इस महीने तीन राज्यसभा सीटें पहले ही खाली हो चुकी हैं, क्योंकि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा नेता डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी तथा जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो गया है। अब यदि डॉ. मुरुगन तमिलनाडु चुनाव जीतकर राज्य विधानसभा में प्रवेश करते हैं, तो एक और राज्यसभा सीट रिक्त हो जाएगी। इससे राजनीतिक समीकरण बदलने और भाजपा तथा कांग्रेस दोनों के भीतर नए शक्ति संतुलन बनने की संभावना है।

राज्यसभा चुनाव का गणित

राज्यसभा चुनाव में सीटों का निर्धारण एक निश्चित फार्मूले से होता है—(कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1)) + 1। मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं। यदि तीन सीटें खाली मानी जाएं, तो जीत का कोटा 58 वोट तय होता है।

भाजपा के पास 160 से अधिक विधायक होने के कारण वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं, जिससे उसे एक सीट मिलना संभव दिखता है, लेकिन समीकरण पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भाटी को आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अयोग्य घोषित किया गया है। वहीं मुकेश मालहोत्रा का चुनाव भी निरस्त किया गया था क्योंकि उन्होंने लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। इसके अलावा निर्मला सप्रे, जो अब भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, मतदान नहीं कर सकतीं।

इस तरह कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से 62 वोट बचते हैं, जो जीत के कोटे से सिर्फ चार अधिक हैं। ऐसे में यदि चार विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं, तो कांग्रेस की एक सुनिश्चित सीट भी खतरे में पड़ सकती है। राजनीतिक हलकों में हाल के संकेतों को लेकर भी चिंता है, जहां वैचारिक मतभेद और मंच साझा करने जैसी गतिविधियां सामने आई हैं।

भाजपा के पास 47 अतिरिक्त वोट हैं, जो 58 के कोटे से 11 कम हैं। ऐसे में वह कांग्रेस खेमे में सेंध लगाकर समीकरण बदलने की कोशिश कर सकती है।

यदि मुरुगन की सीट भी खाली होती है, तो जीत का कोटा घटकर 47 रह जाएगा, जिससे मुकाबला और भी कड़ा हो जाएगा।

यदि मुरुगन और कुरियन राज्य की राजनीति में जाते हैं, तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी रिक्तियां उत्पन्न होंगी। मध्य प्रदेश के कई नेता ‘टीम मोदी’ में स्थान पाने की कोशिश में हैं।

हरश चौहान और रंजना बघेल जैसे नाम चर्चा में हैं। वहीं कांग्रेस में दिग्विजय सिंह के तीसरे कार्यकाल से इनकार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। दलित, ब्राह्मण और सिंधी प्रतिनिधित्व को लेकर भी संतुलन साधने की कोशिश चल रही है।

इसी बीच भारत आदिवासी पार्टी के एकमात्र विधायक कमलेश्वर डोडियार ने भी उम्मीदवार उतारने के संकेत दिए हैं। ऐसे में बेहद करीबी मुकाबले में एक-एक वोट परिणाम बदलने की क्षमता रखता है। 

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