नई दिल्ली, 14 मई।
भारत में बायोटेक्नोलॉजी और उन्नत सेल थेरेपी के क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने तेलंगाना स्थित हैदराबाद की एक कंपनी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता “मल्टीपल मायलोमा के उपचार हेतु नए दोहरे लक्ष्य वाले काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-कोशिकाओं के निर्माण और चरण-1 क्लीनिकल परीक्षण” नामक परियोजना के लिए किया गया है, जिसे भारत-सिंगापुर सहयोग ढांचे के तहत सिंगापुर की एक साझेदार संस्था के साथ मिलकर लागू किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य एक उन्नत दोहरे लक्ष्य वाली कार-टी सेल थेरेपी विकसित करना है, जो मल्टीपल मायलोमा नामक गंभीर और वर्तमान में असाध्य रक्त कैंसर के उपचार में सहायक हो सके। मौजूदा कार-टी थेरेपी बीसीएमए लक्ष्य पर काम करती है और पुनः उभरने वाले रोगियों में कुछ सकारात्मक परिणाम देती है, लेकिन नई तकनीक में बीसीएमए के साथ-साथ सीडी19 मार्कर को भी एक साथ लक्षित करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे उपचार की प्रभावशीलता और रोगमुक्ति की अवधि बढ़ सके।
इस योजना के अंतर्गत संबंधित कंपनी द्वारा अगली पीढ़ी की दोहरे लक्ष्य वाली कार-टी कोशिकाओं का विकास, निर्माण और चरण-1 क्लीनिकल परीक्षण किया जाएगा। यह उपचार उन मरीजों के लिए होगा जो पहले ही कई प्रकार के उपचार ले चुके हैं और जिनके पास अब सीमित विकल्प बचे हैं।
कार-टी थेरेपी में मरीज की अपनी टी-लिम्फोसाइट कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित कर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और उन्हें नष्ट करने के लिए सक्षम बनाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार दोहरे लक्ष्य की यह नई रणनीति पारंपरिक एकल-लक्ष्य थेरेपी की तुलना में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रगति है, जिससे कठिन रोगों में लंबे समय तक रोगमुक्ति की संभावना बढ़ सकती है।
यह परियोजना भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप उन्नत जैविक तकनीक, सटीक चिकित्सा और अगली पीढ़ी की स्वास्थ्य तकनीकों में देश की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही यह भारत और सिंगापुर के बीच जैव-चिकित्सा नवाचार क्षेत्र में सहयोग को भी और सुदृढ़ करती है।
कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव ने कहा कि उन्नत सेल और जीन थेरेपी भविष्य की सटीक चिकित्सा का आधार हैं और यह जटिल तथा असाध्य बीमारियों के उपचार में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकते हैं। वहीं कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा कि इस सहयोग से क्लीनिकल परीक्षण और तकनीक के व्यावसायीकरण की प्रक्रिया तेज होगी तथा भारत में उन्नत कैंसर उपचार की उपलब्धता बढ़ेगी।











