नई दिल्ली, 11 मई।
केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए घोषणा की है कि 1 जुलाई से नया विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू किया जाएगा। इसके साथ ही वर्तमान में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह परिवर्तन पूरी तरह सुव्यवस्थित तरीके से लागू होगा और किसी भी श्रमिक के रोजगार पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि 1 जुलाई से नया कानून सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावी होगा। मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि इस बदलाव के दौरान कोई भी श्रमिक काम से वंचित नहीं रहेगा और सभी चल रही परियोजनाएं बिना रुकावट जारी रहेंगी।
निर्देशों के अनुसार 30 जून तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के अंतर्गत चल रहे सभी कार्य नए मिशन में समाहित कर लिए जाएंगे। किसी भी योजना या कार्य को बीच में नहीं रोका जाएगा और पूरा बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन श्रमिकों के जॉब कार्ड ई-केवाईसी से सत्यापित हैं, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे। जिन श्रमिकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उन्हें भी काम से वंचित नहीं किया जाएगा और उनका पंजीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर पहले की तरह जारी रहेगा।
नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है, जो पहले 100 दिन थी। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
वित्तीय प्रबंधन के तहत सामान्य राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारें क्रमशः 60 और 40 प्रतिशत खर्च वहन करेंगी, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक खर्च उठाएगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों को इस नई व्यवस्था का मुख्य आधार बताया है और कहा है कि इससे ग्रामीण विकास, आधारभूत ढांचे में सुधार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कृषि कार्यों के व्यस्त समय जैसे बुवाई और कटाई के दौरान राज्य सरकारों को इस योजना के कार्यों को अधिकतम 60 दिनों तक नियंत्रित करने का अधिकार भी दिया गया है।






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