भोपाल, 09 मई।
मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और आस्था केंद्रों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिरों की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार पहली बार एमबीए पाठ्यक्रम के अंतर्गत टेंपल मैनेजमेंट कोर्स शुरू करने जा रही है। इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से की जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशिक्षित प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर, ओरछा सहित अन्य बड़े धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। अब केवल त्योहारों या विशेष अवसरों पर ही नहीं, बल्कि सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में भी भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन जैसे धार्मिक नगरों में सामान्य दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहने लगी है। ऐसी स्थिति में भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षित प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रबंधन मॉडल अन्य धार्मिक स्थलों जैसे मस्जिद और चर्च की व्यवस्थाओं में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
नए पाठ्यक्रम में धार्मिक विषयों के साथ आधुनिक प्रबंधन प्रणाली पर विशेष जोर रहेगा। विद्यार्थियों को भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग प्रबंधन, श्रद्धालुओं की आवाजाही, स्वच्छता व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा पूजन सामग्री जैसे फूल-माला, नारियल और अन्य वस्तुओं के उपयोग तथा निस्तारण की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी। धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं को तकनीकी रूप से बेहतर बनाने पर भी फोकस रहेगा।











