भोपाल, 09 अप्रैल 2026।
महाकुंभ के दौरान वायरल हुई मोनालिसा मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच रिपोर्ट में उसे नाबालिग बताया गया है। इस मामले ने नया मोड़ लेते हुए कानूनी कार्रवाई को भी तेज कर दिया है।
आयोग की जांच में दावा किया गया है कि केरल में हुए कथित विवाह के समय युवती की उम्र 18 वर्ष से कम थी। यह मामला तब सामने आया जब 17 मार्च 2026 को अधिवक्ता प्रथम दुबे ने आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आयोग के निर्देश पर एक जांच दल ने केरल से लेकर महेश्वर तक दस्तावेजों और तथ्यों की गहन जांच की।
जांच रिपोर्ट में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व और पूर्व न्यायाधीश व सलाहकार प्रकाश उइके के मार्गदर्शन में की गई कानूनी जांच के आधार पर यह निष्कर्ष सामने आया कि विवाह के समय युवती को बालिग बताकर पेश किया गया था, जबकि वह पारधी जनजाति समुदाय की नाबालिग लड़की थी।
महेश्वर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड में उसकी जन्म तिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज पाई गई, जिसके अनुसार 11 मार्च 2026 को हुए विवाह के समय उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी। जांच में यह भी सामने आया कि केरल में विवाह पंजीयन के लिए उपयोग किए गए जन्म प्रमाण पत्र में अलग जन्म तिथि दर्ज थी, जिसे संदिग्ध मानते हुए निरस्त करने की अनुशंसा की गई है।
आयोग की अनुशंसा के बाद महेश्वर थाने में अपहरण सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
इंदौर आईजी के अनुसार एफआईआर दर्ज हो चुकी है और आगे विवेचना जारी है, साथ ही इस मामले में राजनीतिक और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। कुछ संगठनों और व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
इस मामले में अब आयोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है और 22 अप्रैल 2026 को केरल एवं मध्य प्रदेश के डीजीपी को नई दिल्ली तलब किया गया है। आयोग ने विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और हर तीन दिन में प्रगति रिपोर्ट मांगी जाएगी।





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