मध्य प्रदेश
28 Apr, 2026

एमपी में जंगली भैंसों की वापसी, कान्हा में शुरू हुआ पुनर्स्थापन अभियान

मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की वापसी के लिए असम से लाए गए भैंसों को कान्हा में बसाया जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूती मिलेगी।

भोपाल, 28 अप्रैल।

मध्य प्रदेश में लंबे अंतराल के बाद जंगली भैंसा प्रजाति की वापसी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। करीब एक सदी पहले समाप्त हो चुकी इस प्रजाति को पुनः बसाने के लिए असम के काजीरंगा से चार जंगली भैंसे प्रदेश लाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट जिले के सूपखार और टोपला क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का शुभारंभ करेंगे।

अधिकारियों के अनुसार सूपखार क्षेत्र में जिन जंगली भैंसों को छोड़ा जाएगा, उनमें तीन मादा और एक नर शामिल हैं। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहेंगे। इस प्रयास से न केवल जंगली भैंस प्रजाति के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वन पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।

बताया गया कि इस परियोजना के अंतर्गत असम से जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में स्थापित किया जा रहा है। प्रारंभिक चरण में चार भैंसों का समूह रवाना हो चुका है और कुल 50 भैंसों को ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में बसाने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान सत्र में आठ भैंसों के स्थानांतरण की योजना है।

इस पहल के साथ मध्य प्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान का नया चरण भी शुरू होगा। योजना के तहत असम से गैंडे के दो जोड़े मध्य प्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। इसके बदले में प्रदेश से तीन बाघ और छह मगरमच्छ असम भेजे जाएंगे।

चीता पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी प्रदेश की जैव विविधता को और समृद्ध बनाएगी। यह पहल वन्य प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। मध्य प्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है और यह कदम इस प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में जंगली भैंसों की संख्या लगभग 100 वर्ष पूर्व समाप्त हो गई थी। कान्हा के सूपखार क्षेत्र में वर्ष 1979 के आसपास अंतिम बार जंगली भैंसा देखा गया था। शिकार, मानवीय दखल, आवास की क्षति और घासभूमि के नष्ट होने से यह प्रजाति खत्म हो गई थी। वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी असम में पाई जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में संख्या अत्यंत सीमित है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त क्षेत्र माना गया है। यहां विस्तृत घासभूमि, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानवीय हस्तक्षेप जैसी परिस्थितियां इस प्रजाति के लिए अनुकूल हैं। सूपखार में इनकी रिहाई के साथ ‘वाइल्ड-टू-वाइल्ड’ पुनर्स्थापना परियोजना नए चरण में प्रवेश करेगी।

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