काठमांडू, 09 अप्रैल।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही राजनीतिक गतिविधियों में सख्ती दिखाते हुए केवल पंद्रह दिन में एक मंत्री को बर्खास्त कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने यह कदम श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह के विवादित फैसलों के कारण उठाया। साह ने अपनी पत्नी जुनु श्रेष्ठ को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में पुनः सदस्य नियुक्त किया था, जो सार्वजनिक और राजनीतिक विवाद का कारण बना। उनके पिछले राजनीतिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड को भी लेकर सवाल उठाए गए।
इस घटना के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने साह पर पद की मर्यादा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इस पत्र के आधार पर शाह ने साह को पदमुक्त कर दिया। उल्लेखनीय है कि साह को मंत्री पद केवल 13 दिन पहले ही दिया गया था।
साथ ही, मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाने के आरोप में रास्वपा प्रमुख ने स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्री निशा मेहता को भी चेतावनी देने की सिफारिश की। प्रधानमंत्री शाह ने इस सिफारिश के अनुसार मंत्री मेहता को भी सचेत कर दिया।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह अपने मंत्रिमंडल में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखने के प्रति गंभीर हैं।





.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)
