भोपाल, 09 अप्रैल 2026।
प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई तस्वीर उभरने लगी है। जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक की गोलियों की दहशत थी, अब वहां शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मोहन सरकार ने बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के 100 नक्सल प्रभावित गांवों के लिए 332 करोड़ रुपये की लागत से विशेष मास्टर प्लान तैयार किया है। योजना का उद्देश्य इन गांवों को मुख्यधारा से जोड़ना और स्थानीय लोगों को बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस योजना पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री से भी चर्चा की है।
इस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 200 करोड़ रुपए सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। प्रशासन ने 150 किलोमीटर लंबी उन सड़कों की पहचान की है जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल नहीं हो पाई थीं। ये सड़कें एक से अधिक गांवों को आपस में जोड़ेंगी, जिससे ग्रामीण आसानी से शहरों तक पहुंच सकेंगे।
गांवों में बिजली की सुविधा सुधारने के लिए 13 से 14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। अब बच्चों को भी पढ़ाई के लिए पर्याप्त रोशनी उपलब्ध होगी, जहां पहले बिजली की लाइनें बिछाना भी चुनौतीपूर्ण था।
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 8 करोड़ रुपये की लागत से दो नए आईटीआई कॉलेज खोले जाएंगे। इसके अतिरिक्त, मछली पालन, बागवानी और उन्नत कृषि के विस्तार के लिए करीब 2 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। इस कदम से नक्सल प्रभावित गांवों में समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।


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