रायपुर, 11 अप्रैल।
तिल्दा ब्लॉक के साकरा गांव में किसान संजय वर्मा ने पारंपरिक खेती से हटकर नवाचार करते हुए रजनीगंधा की खेती को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है और वर्तमान में वे इससे लगभग 6 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं।
शासकीय योजनाओं के सहयोग से मिली सहायता के बाद उन्होंने धान की खेती छोड़कर रजनीगंधा की खेती शुरू की, जो अब उनके लिए मुख्य आजीविका का साधन बन चुकी है।

करीब 8 वर्ष पहले फसल चक्र परिवर्तन की दिशा में उठाया गया यह कदम अब सफल साबित हो चुका है और राष्ट्रीय बागवानी मिशन से प्राप्त 75 हजार रुपये के अनुदान ने इस शुरुआत को मजबूती प्रदान की।
उनकी उगाई रजनीगंधा की मांग अब स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर नागपुर जैसे बड़े शहरों तक पहुंच गई है और शादी-विवाह व धार्मिक आयोजनों में इन फूलों की निरंतर मांग से उन्हें सालभर स्थायी आय मिल रही है।
कम लागत और अधिक लाभ वाली इस खेती में एक एकड़ से लगभग 1 लाख स्टिक का उत्पादन होता है, जबकि चार एकड़ में की जा रही खेती से लगभग 9.60 लाख रुपये का उत्पादन प्राप्त हो रहा है और इसमें करीब 5.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
संजय वर्मा का कहना है कि शुरुआत में उन्हें संदेह जरूर था, लेकिन मेहनत और जिला प्रशासन के उचित मार्गदर्शन से उन्हें सफलता मिली और अब वे आसपास के किसानों को भी फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जिला उद्यानिकी अधिकारी के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी मिशन किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है, जिसके तहत किसान पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर फसल चक्र परिवर्तन अपनाते हुए फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं और कम लागत में अधिक आय अर्जित कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।



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