संपादकीय
11 Apr, 2026

पीएम पोषण योजना से संवर रहा बचपन, मध्यप्रदेश में 40 लाख से अधिक बच्चों को रोज मिल रहा पौष्टिक आहार

मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण कार्यक्रम के तहत 40 लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया जा रहा है।

11 अप्रैल।
भोपाल। बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव मजबूत करने में पोषण की अहम भूमिका होती है। इसी सोच के साथ संचालित “प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण कार्यक्रम” (पीएम पोषण) मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू होकर नई मिसाल कायम कर रहा है। यह योजना न केवल बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रही है, बल्कि स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति और सीखने की क्षमता को भी बढ़ा रही है।
प्रदेश में इस योजना का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम शिक्षा व स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं। 87 हजार से अधिक स्कूलों में संचालित यह योजना मध्यप्रदेश के लगभग 87 हजार 915 बाल वाटिका, प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में लागू है। इन स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिदिन निर्धारित मानकों के अनुसार गर्म और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। यह व्यापक नेटवर्क दर्शाता है कि सरकार योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में इस योजना से बड़ी संख्या में बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, 57 हजार 096 प्राथमिक विद्यालयों के 24 लाख 36 हजार 489 और 30 हजार 819 माध्यमिक विद्यालयों के 15 लाख 60 हजार 901 विद्यार्थियों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इस तरह कुल मिलाकर 40 लाख से अधिक बच्चों तक यह योजना पहुंच रही है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल बच्चों की भूख मिट रही है, बल्कि उनके पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है।
योजना के संचालन में 65 हजार 464 स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। ये समूह भोजन तैयार करने, उसकी गुणवत्ता बनाए रखने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। स्व-सहायता समूहों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
पीएम पोषण योजना महिला सशक्तिकरण का भी एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। प्रदेश में लगभग 2.3 लाख महिला रसोइये इस योजना से जुड़ी हुई हैं, जो प्रतिदिन लाखों बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं। इन महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिला है, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह पहल विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रही है।
प्रदेश के 22 जिलों के 66 शहरी क्षेत्रों में केंद्रीयकृत किचन के माध्यम से भोजन तैयार किया जा रहा है। इन आधुनिक किचनों में स्वच्छता और गुणवत्ता के उच्च मानकों का पालन किया जाता है। केंद्रीयकृत व्यवस्था से भोजन की निगरानी आसान हुई है और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। इससे बच्चों को सुरक्षित और संतुलित आहार मिल रहा है।
योजना का एक महत्वपूर्ण असर स्कूलों में बच्चों की बढ़ती उपस्थिति के रूप में सामने आया है। विशेषकर गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए यह योजना एक बड़ा प्रोत्साहन साबित हो रही है। भोजन की उपलब्धता के कारण अभिभावक भी बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इससे ड्रॉपआउट दर में कमी आई है और शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है।
बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में कैलोरी, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों का ध्यान रखा जाता है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पौष्टिक आहार मिलने से बच्चों की एकाग्रता, ऊर्जा और सीखने की क्षमता में वृद्धि होती है। यह उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
पीएम पोषण योजना सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देती है। सभी वर्गों के बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जिससे भेदभाव की भावना कम होती है और आपसी भाईचारा बढ़ता है। यह पहल बच्चों में समानता और सहयोग की भावना विकसित करने में सहायक है, जो एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जरूरी है।
हालांकि, योजना का क्रियान्वयन प्रभावी है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां बनी हुई हैं। कई बार दूरस्थ इलाकों में समय पर भोजन पहुंचाने में दिक्कत आती है। इसके अलावा गुणवत्ता की निरंतर निगरानी भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर और तकनीक का उपयोग कर इन चुनौतियों को कम किया जा सकता है।
राज्य सरकार योजना को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मेन्यू में विविधता, स्थानीय खाद्य पदार्थों का समावेश और पोषण जागरूकता जैसे कदम भविष्य में इसे और प्रभावी बना सकते हैं। यदि इसी तरह योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वयन जारी रहा, तो यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव ला सकती है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण कार्यक्रम मध्यप्रदेश में बच्चों के जीवन में बदलाव की एक मजबूत कड़ी बनकर उभरा है। यह योजना न केवल भूख मिटा रही है, बल्कि बच्चों के भविष्य को भी संवार रही है। पोषण, शिक्षा और सशक्तिकरण के इस त्रिस्तरीय प्रभाव के साथ यह योजना प्रदेश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में इसके और बेहतर परिणाम सामने आने की उम्मीद है।
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