भोपाल, 21 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में रबी विपणन सीजन के तहत गेहूं खरीदी का अभियान पूरी गति से जारी है। प्रदेश के खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मंगलवार को महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि अब तक राज्य के 1 लाख 88 हजार 971 किसानों से सफलतापूर्वक 81 लाख 76 हजार 970 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। शासन की ओर से भुगतान प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है, जिसके अंतर्गत 1 लाख से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में 1083 करोड़ 80 लाख रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित कर दी गई है। अब तक लगभग 6.24 लाख किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक कर लिए हैं।
किसानों की सहूलियत और खरीदी की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने केंद्रों की क्षमता में भारी इजाफा किया है। पूर्व में प्रति केंद्र प्रतिदिन स्लॉट बुकिंग की सीमा जो 1000 क्विंटल थी, उसे पहले 1500 और अब बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है ताकि किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 3171 उपार्जन केंद्र क्रियाशील हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेटेलाइट मिलान में विसंगति वाले खसरों को छोड़कर किसानों के अन्य सभी खसरों पर फसल बेचने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
प्रदेश के अन्नदाताओं को इस बार समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ भी दिया जा रहा है। सरकार 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर 40 रुपये का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर रही है। उपार्जन केंद्रों पर किसानों के बैठने के लिए छायादार स्थान, पेयजल और उपज की गुणवत्ता जांचने के लिए आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की गई है। खरीदी के साथ-साथ भंडारण और परिवहन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है; अब तक 64 लाख 58 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
इस वर्ष मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए पंजीकरण का नया रिकॉर्ड बना है। कुल 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में 3.60 लाख अधिक है। विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ने इस बार 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्री राजपूत के अनुसार, बारदानों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और पीपी बैग्स के साथ जूट के बोरों का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि अनाज को सुरक्षित रखा जा सके।









