नई दिल्ली, 25 मई ।
केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण देश के कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस के आयात पर प्रभाव पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को बाधित नहीं होने देने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकारी पक्ष ने बताया कि इस स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, जिसमें कच्चा तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस शामिल हैं, इसलिए वैश्विक परिस्थितियों का सीधा असर आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक रिफाइनरी स्तर पर एलपीजी उत्पादन को बढ़ाया गया है और यह अब प्रतिदिन लगभग 50 हजार टन तक पहुंच गया है, जिससे घरेलू आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
इसके अलावा रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में करोड़ों बुकिंग के मुकाबले अधिक संख्या में सिलेंडरों की डिलीवरी सुनिश्चित की गई है और अधिकांश डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड के साथ पूरी की जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एलपीजी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वितरक लगातार सक्रिय हैं और छुट्टी के दिन भी सिलेंडरों की आपूर्ति जारी रखी गई।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिली है।
सरकार ने यह भी कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं तथा विदेशों में निवेश और आपूर्ति सहयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।






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