हरिद्वार, 08 अप्रैल 2026।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिस वैश्विक परियोजना को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जटिलता के कारण पूरी तरह नहीं कर पाया था, उसे पतंजलि ने अपने निरंतर शोध के माध्यम से सफल बनाया है। इस प्रयास के तहत ‘विश्व भेषज संहिता’ के 109 खंड तैयार किए गए हैं, जिसने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा और वनस्पति विज्ञान में नया अध्याय जोड़ा है।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने 1999 में विश्व के औषधीय पौधों और पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण की पहल की थी, लेकिन 2010 तक केवल तीन वॉल्यूम प्रकाशित कर सका। इसके विपरीत, पतंजलि ने 2003-04 से इस काम को आगे बढ़ाते हुए 3.60 लाख पौधों में से 50 हजार औषधीय पौधों की पहचान की। इसके अलावा 2000 से अधिक जनजातीय परंपराओं का दस्तावेजीकरण और 964 हीलिंग प्रैक्टिसेस का संकलन किया गया। इस विशाल ग्रंथ में लगभग 1.25 लाख पृष्ठों में 2200 से अधिक स्रोतों के आधार पर जानकारी संकलित की गई है।
आचार्य बालकृष्ण ने यह भी बताया कि अब गूगल ने अपनी एआई तकनीक के लिए पतंजलि से इस साक्ष्य-आधारित डेटा प्राप्त करने का अनुरोध किया है। यह कदम भारतीय पारंपरिक ज्ञान की वैश्विक स्वीकार्यता और उसके महत्व को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस उपलब्धि ने भारत की औषधीय वनस्पति और पारंपरिक चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई है।
इस उपलब्धि के साथ ही पतंजलि योगपीठ ने न केवल शोध और अनुसंधान में उत्कृष्टता दिखाई है, बल्कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित भी किया है।













