इस्लामाबाद, 09 मई।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर अगले सप्ताह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक बार फिर वार्ता होने की संभावना जताई गई है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार दोनों देश मध्यस्थों के माध्यम से एक ऐसे प्रारूप पर काम कर रहे हैं, जिससे आगे औपचारिक बातचीत का मार्ग खुल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को कम करने तथा संवर्धित यूरेनियम भंडार को किसी अन्य देश में स्थानांतरित करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से संकेत दिया गया है कि उन्हें ईरान से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद है और यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो संघर्ष विराम की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
वहीं ईरान ने साफ किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम या संवर्धित यूरेनियम से जुड़े किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। इसी कारण दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे बने हुए हैं। इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन किसी ठोस नतीजे तक बात नहीं पहुंच सकी थी।
पिछले चौबीस घंटों में क्षेत्रीय तनाव से जुड़ी कई घटनाएं भी सामने आई हैं। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने बड़ी संख्या में जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोक दिया है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में हस्तक्षेप हुआ तो स्थिति फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकती है।
इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात में मिसाइल और ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई है, जिन्हें उसकी रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की रणनीति क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर गाजा और लेबनान में भी सैन्य तनाव के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है, जहां हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बहरीन में भी ईरान से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं।





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