तेहरान, 09 मई
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशों के बीच वार्ता फिलहाल ठप पड़ती दिखाई दी है, जबकि खाड़ी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच शुक्रवार को फिर से सैन्य तनाव बढ़ गया। इसी बीच एक अमेरिकी खुफिया आकलन में दावा किया गया है कि ईरान समुद्री नाकेबंदी का लगभग चार महीने तक सामना करने में सक्षम है।
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ईरान पर अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी का तत्काल गंभीर आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ेगा और वह आने वाले कुछ महीनों तक स्थिति को संभाल सकता है। इस आकलन से संकेत मिलता है कि शांति वार्ता के प्रयासों के बावजूद अमेरिका की दबाव क्षमता सीमित बनी हुई है। हालांकि, एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है और व्यापार, राजस्व तथा आर्थिक ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है।
हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में संघर्ष की तीव्रता बढ़ी है, जो पिछले एक महीने से जारी संघर्षविराम के बाद सबसे बड़ा तनाव माना जा रहा है। इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात पर भी नए हमले दर्ज किए गए हैं।
वहीं अमेरिका ने ईरान से जुड़े दो जहाजों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें ईरानी बंदरगाह में प्रवेश करने से रोक दिया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने उनके मार्ग को बाधित कर उन्हें वापस लौटने पर मजबूर किया।
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई संघर्षविराम का उल्लंघन है, जबकि अमेरिकी पक्ष का कहना है कि वह समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। ईरान ने होर्मुज जलमार्ग में गैर-ईरानी जहाजों की आवाजाही पर पहले से ही कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया और ब्रेंट क्रूड के भाव सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए। विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा केंद्र है और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
संघर्ष केवल समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान से आए मिसाइल और ड्रोन हमलों को निष्क्रिय करने का दावा किया है, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है।
अमेरिका ने कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध भी कड़े कर दिए हैं और कई कंपनियों तथा व्यक्तियों पर कार्रवाई की गई है। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान की सैन्य क्षमता और हथियार उत्पादन नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार कदम उठाता रहेगा।












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