नई दिल्ली, 08 मई।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए अपराधियों को पैरोल दिए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने ऐसे मामलों में सख्ती बढ़ाने की जरूरत बताते हुए केंद्र सरकार को जल्द महत्वपूर्ण सिफारिश भेजने की बात कही है।
आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया किशोर रहाटकर ने कहा कि दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, गंभीर यौन उत्पीड़न और पोक्सो जैसे मामलों में दोषियों को पैरोल नहीं दिए जाने को लेकर सरकार से आग्रह किया जाएगा। उनका कहना है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
हाल ही में सामने आई एक घटना का उल्लेख करते हुए आयोग ने कहा कि इस प्रकार के मामलों ने कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। ऐसे अपराधों में पीड़ितों को त्वरित और प्रभावी न्याय मिलना बेहद आवश्यक है।
महिला आयोग ने न्याय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इनमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना और जांच प्रक्रिया में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना शामिल है।
आयोग ने यह भी कहा कि सबूतों की जांच, गवाहों के बयान और ट्रायल प्रक्रिया को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए अलग और प्रभावी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। इसके अलावा आदतन अपराधियों पर विशेष निगरानी रखने की भी आवश्यकता बताई गई है।
पोक्सो और अन्य यौन अपराधों में बार-बार शामिल होने वाले आरोपितों की गतिविधियों पर लगातार पुलिस निगरानी रखने का सुझाव भी दिया गया है। जरूरत पड़ने पर अच्छे व्यवहार के लिए बांड भरवाने जैसे कदम उठाने की बात कही गई है।
आयोग का कहना है कि इन प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण तैयार करना और पीड़ितों को जल्द न्याय उपलब्ध कराना है।



.jpg)

.jpg)

.jpg)

.jpg)
