नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया और युवाओं की शक्ति तथा उनके राष्ट्र निर्माण में योगदान पर विशेष जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच पर अपने संदेश में कहा कि देश के युवा जो संकल्प लेते हैं, उसे पूरा करके दिखाते हैं तथा उनकी यही सामर्थ्य भारत को तीव्र विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने अपने संदेश के साथ एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें जीवन के कठिन क्षणों में धैर्य और विवेक बनाए रखने की प्रेरणा दी गई है।
सुभाषित में कहा गया है कि विपत्ति, आर्थिक संकट, भय अथवा जीवन के अंतिम क्षणों जैसी विषम परिस्थितियों में जो व्यक्ति अपनी बुद्धि से विचार करते हुए धैर्य बनाए रखता है, वह कभी विचलित नहीं होता।
इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि शांत रहकर और सोच-समझकर लिए गए निर्णय व्यक्ति को दुःख और हानि से बचाते हैं तथा जीवन में स्थिरता प्रदान करते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संदेश मानसिक दृढ़ता को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण रूप से सामने लाता है।





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