अहमदाबाद, 25 अप्रैल।
अहमदाबाद में वर्ष 2013 के चर्चित राजू ठक्कर पुलिस हिरासत मौत मामले में शनिवार को भद्र सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए सरदार नगर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन पीएसआई बाबू पटेल सहित सात पुलिसकर्मियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि हत्या, अवैध हिरासत और साक्ष्य नष्ट करने जैसे गंभीर आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर सभी आरोपितों को निर्दोष मानते हुए रिहा करने का आदेश दिया गया।
यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज एक घरफोड़ चोरी प्रकरण की जांच से जुड़ा है, जिसमें पुलिस को आशाबेन राजूभाई ठक्कर के नाम पर पंजीकृत मोबाइल फोन मिला था। इसी आधार पर पुलिस ने राजू उर्फ क्रांति ठक्कर की तलाश शुरू की थी। 8 मई 2013 को उसे सारंगपुर ब्रिज के नीचे से हिरासत में लिया गया था।
आरोप था कि पूछताछ के दौरान उसे अजितमिल चौकी में अवैध रूप से रखकर प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। साथ ही शव को साबरमती नदी में फेंककर साक्ष्य मिटाने का भी आरोप लगाया गया था। मामले में कुल आठ पुलिसकर्मी नामजद थे, जिनमें से एक आरोपी का निधन ट्रायल के दौरान हो गया, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई।



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