वॉशिंगटन, 09 मई।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस और यूक्रेन के शीर्ष नेताओं ने उनके प्रस्ताव पर तीन दिनों के युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली के लिए सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यह कदम लंबे समय से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में “अंत की शुरुआत” साबित हो सकता है।
ट्रंप ने बताया कि यह सहमति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों से सीधे बातचीत के बाद बनी है। उनके अनुसार दोनों नेताओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है और इस दौरान कुछ समय के लिए हिंसा पूरी तरह रोकने पर सहमति बनी है।
उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि यह युद्धविराम शनिवार से सोमवार तक लागू रहेगा। रूस में 9 मई को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की स्मृति में आयोजित होता है। इस अवसर को ध्यान में रखते हुए भी यह अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव रखा गया था।
समझौते के तहत दोनों देशों द्वारा एक हजार-एक हजार कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने दोनों नेताओं से सीधे बातचीत कर यह अनुरोध किया था और उम्मीद जताई कि यह पहल लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।
रूस ने पहले ही एक अलग अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाए, जिसके चलते वह प्रयास सफल नहीं हो सका। इसी तरह यूक्रेन की ओर से घोषित युद्धविराम भी पहले ही टूट चुका था।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि कैदियों की वापसी उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह निर्णय उसी संदर्भ में लिया गया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के लिए रेड स्क्वायर से अधिक महत्वपूर्ण उनके सैनिकों की वापसी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के तहत यूक्रेनी बलों को रेड स्क्वायर पर हमले से रोका गया है।
इस पर रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई और क्रेमलिन ने इसे हल्के में लेते हुए कहा कि विजय दिवस मनाने के लिए उन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि यह समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से संभव हुआ है और उन्होंने इसके लिए अमेरिकी नेतृत्व को धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस इस समझौते का पालन करेगा और अमेरिका इस प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री ने कहा कि अब तक शांति वार्ता से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है, लेकिन अमेरिका अभी भी किसी भी समय मध्यस्थता के लिए तैयार है यदि परिस्थितियां बदलती हैं।












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