नई दिल्ली, 28 अप्रैल
सयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से उत्पन्न वैश्विक प्रभावों के बीच इस पूरे संकट का शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी तथा गाजा और लेबनान की गंभीर मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई।
भारत यात्रा पर पहुंचीं महासभा अध्यक्ष ने हैदराबाद हाउस में विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि केवल युद्धविराम से समाधान संभव नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और समानता के सिद्धांतों के आधार पर स्थायी शांति आवश्यक है। उन्होंने गाजा और लेबनान में बिगड़ती मानवीय स्थिति तथा शांति सैनिकों पर हमलों की कड़ी निंदा की।
उन्होंने सुरक्षा परिषद सुधार पर लंबे समय से जारी चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बहस सत्रह वर्षों से चल रही है और वर्तमान में इसमें और तेजी आई है। उनका कहना था कि कुछ स्थायी सदस्य देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के कमजोर होने की स्थिति चिंता का विषय है तथा अफ्रीकी संघ जैसे महाद्वीपों को प्रतिनिधित्व न मिलना संगठन की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है।
महासभा अध्यक्ष ने बताया कि उनकी विदेश मंत्री के साथ बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, महामारी और युद्धों के आर्थिक प्रभाव जैसी चुनौतियां किसी भी देश द्वारा अकेले नहीं संभाली जा सकतीं। अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति सभी के हित में है।
उन्होंने कहा कि युद्धविराम की दिशा में हर प्रयास महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध और हमलों का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इससे तेल और खाद की कीमतें बढ़ रही हैं तथा कुछ देशों ने ऊर्जा आपातकाल भी घोषित किया है। गाजा में मानवीय संकट और लेबनान में बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति बेहद गंभीर है।
महासभा अध्यक्ष ने शांति सैनिकों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा सभी सदस्य देशों की जिम्मेदारी है, क्योंकि वे दुनिया में शांति बनाए रखने के लिए अपने जीवन का योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि इस संघर्ष का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष के रूप में अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की रक्षा करना है। इसी उद्देश्य से बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए वैश्विक गठबंधन का आह्वान किया गया है।
भारत की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के गठन से लेकर आज तक संगठन के सभी स्तंभों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बड़ी संख्या में भारतीय शांति सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी है और भारत सतत विकास लक्ष्यों तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।












