भोपाल, 28 अप्रैल
प्रदेश में हर सीजन में खाद वितरण को लेकर होने वाली भीड़ और अव्यवस्था से बचाव के लिए सरकार ने जबलपुर, शाजापुर और विदिशा में ई-विकास पोर्टल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया था, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इसे एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को उनकी जमीन के क्षेत्रफल और फसल के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी। ई-विकास पोर्टल के माध्यम से टोकन जनरेट होगा, जिसकी वैधता तीन दिन तक रहेगी। सहकारी समिति के सदस्य किसानों को संबंधित दुकानों का टोकन मिलेगा, जबकि सदस्य न होने पर उन्हें अन्य दुकानें आवंटित की जाएंगी।
प्रावधान के अनुसार एक माह में किसी भी किसान को 50 बोरी से अधिक खाद नहीं दी जाएगी। यह पूरी प्रणाली भारत सरकार द्वारा भी अपनाई जा रही है और कुछ स्थानों पर इसके पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
खरीफ और रबी दोनों सीजन में हर वर्ष खाद वितरण केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों, कानून व्यवस्था की चुनौतियों और पुलिस बल की तैनाती के साथ होने वाले राजनीतिक विवादों को यह व्यवस्था नियंत्रित करने में सहायक मानी जा रही है।
ई-विकास पोर्टल के जरिए किसान सुबह सात बजे से शाम आठ बजे तक एग्रीस्टेक आईडी में दर्ज भूमि क्षेत्र और फसल के आधार पर ऑनलाइन टोकन बुक कर खाद प्राप्त कर सकते हैं। किसान स्वयं यह तय करेंगे कि उन्हें कौन-सी खाद लेनी है और वितरण के बाद संबंधित केंद्र के स्टॉक में स्वतः कमी दर्ज हो जाएगी, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बना रहेगा। पंजीयन प्रक्रिया मोबाइल ओटीपी के माध्यम से पूरी की जाती है। यदि 72 घंटे के भीतर खाद नहीं ली जाती है तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और प्रक्रिया दोबारा करनी होगी। जिन किसानों की भूमि पोर्टल पर दर्ज नहीं है, वे एसडीएम को आवेदन कर टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
अतिरिक्त नियम
बुजुर्ग, दिव्यांग या बटाईदार किसान अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को खाद लेने के लिए अधिकृत कर सकते हैं। अधिक भूमि होने पर पात्रता के अनुसार भले ही 50 बोरी से अधिक की आवश्यकता हो, फिर भी एक माह में अधिकतम 50 बोरी ही खाद दी जाएगी। कृषि विभाग के अनुसार यह पूरी व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।











