विज्ञान भवन में जारी स्कूल प्रबंधन समिति गाइडलाइंस-2026 में शिक्षा को सामुदायिक भागीदारी से जोड़ते हुए स्कूलों को समाज की साझा जिम्मेदारी के रूप में मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
09 मई।
6 मई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) गाइडलाइंस-2026 जारी की गईं। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारत में लंबे समय तक स्कूलों की जिम्मेदारी केवल सरकार और शिक्षकों तक सीमित मान ली गई। अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की भूमिका अक्सर औपचारिक बैठकों या सीमित निगरानी तक सिमटकर रह गई। इसका परिणाम यह हुआ कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, सामाजिक सहभागिता और स्थानीय आवश्यकताओं के बीच दूरी बढ़ती चली गई। नई एसएमसी गाइडलाइंस इस सोच को बदलने का प्रयास करती दिखाई देती हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा कि देश के लगभग 15 लाख स्कूलों में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और बच्चों के समग्र विकास के लिए एसएमसी महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को “जन आंदोलन” का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था अब केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि इसमें बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल पारदर्शिता और सीखने के परिणाम जैसे विषयों को भी प्राथमिकता देनी होगी।
आज शिक्षा केवल किताबों और परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रह गई है। बच्चों की मानसिक स्थिति, सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता, आधारभूत भाषा और गणितीय क्षमता, समावेशी वातावरण और व्यवहारिक कौशल जैसे विषय भी उतने ही महत्वपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में केवल सरकारी आदेशों से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। इसके लिए स्कूल, अभिभावक और समाज के बीच सक्रिय साझेदारी आवश्यक है। नई गाइडलाइंस इसी साझेदारी को संस्थागत स्वरूप देने का प्रयास करती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्कूल प्रबंधन समितियों को केवल निगरानी करने वाली इकाई के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि उन्हें “स्कूल कम्युनिटी गवर्नेंस” की भूमिका दी जा रही है। इसका अर्थ है कि स्थानीय समुदाय अब शिक्षा की गुणवत्ता, बच्चों के विकास, सुरक्षा और स्कूल के वातावरण में सक्रिय भागीदारी निभाएगा। यदि यह व्यवस्था ईमानदारी से लागू होती है तो सरकारी स्कूलों में विश्वास और जवाबदेही दोनों मजबूत हो सकते हैं।
हालांकि किसी भी नई नीति या गाइडलाइन की सफलता केवल उसके दस्तावेजों से तय नहीं होती। सबसे बड़ी चुनौती उसके प्रभावी क्रियान्वयन की होती है। देश के अनेक हिस्सों में आज भी स्कूल प्रबंधन समितियां केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। कई अभिभावकों को यह तक जानकारी नहीं होती कि वे समिति का हिस्सा हैं या उनकी भूमिका क्या है। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार केवल दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि प्रशिक्षण, जागरूकता और नियमित मूल्यांकन की मजबूत व्यवस्था भी बनाए।
भारत यदि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना चाहता है, तो उसकी नींव मजबूत विद्यालयों और जागरूक समाज पर ही टिकेगी। शिक्षा केवल सरकार का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक दायित्व है। नई एसएमसी गाइडलाइंस इसी सोच को पुनर्जीवित करने का अवसर देती हैं कि स्कूल वास्तव में पूरे समाज के विकास का केंद्र होते हैं।