श्रीनगर, 12 जून।
जम्मू-कश्मीर की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने केंद्र शासित प्रदेश से सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाने की पुरजोर मांग की है। मंत्री ने तर्क दिया कि घाटी में सुरक्षा परिदृश्य में व्यापक सुधार हुआ है और लंबे समय से पत्थरबाजी जैसी अप्रिय घटनाएं भी पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जब पूर्वोत्तर के राज्यों में हालात सुधरने पर एएफएसपीए हटाया जा सकता है, तो यही तर्क जम्मू-कश्मीर पर भी लागू होना चाहिए।
मंत्री की यह टिप्पणी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूर्वोत्तर के अधिकांश क्षेत्रों से एएफएसपीए हटाने की घोषणा के ठीक बाद आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब स्थिति सामान्य है और कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है, तो इस अधिनियम को निरस्त करना ही उचित कदम होगा।
राज्य का दर्जा बहाली के मुद्दे पर मंत्री इटू ने कहा कि मंत्रिमंडल द्वारा पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर उपराज्यपाल के माध्यम से केंद्र को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हम कोई नई मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपना पुराना हक मांग रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द ही वापस मिल जाएगा।
इसके अलावा, उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। मंत्री ने बताया कि 14,000 से अधिक शिक्षकों को जनगणना कार्य में तैनात किया गया है, जिसके कारण शिक्षण और परीक्षाएं प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए इस मामले को गंभीरता से उठाया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं।












