शहडोल, 12 जून।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का विचारपुर गांव इन दिनों फुटबॉल प्रेम और फीफा वर्ल्ड कप जुनून के कारण ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से चर्चा में है। यह गांव लंबे समय से फुटबॉल प्रतिभाओं की नर्सरी माना जाता है, जहां कई पीढ़ियां इस खेल से जुड़ी रही हैं और कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुके हैं।
गांव के हर घर से किसी न किसी खिलाड़ी के नेशनल स्तर पर खेलने की परंपरा रही है। इसी खेल संस्कृति के कारण विचारपुर को मिनी ब्राजील कहा जाता है। यहां के कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए जर्मनी तक भी जा चुके हैं।
क्रिकेट के लिए प्रसिद्ध भारत में अब इस गांव ने फुटबॉल को नई पहचान दी है। आदिवासी अंचल के इस क्षेत्र में बच्चे और युवा सुबह से ही मैदानों में फुटबॉल के साथ अभ्यास करते नजर आते हैं। किसी के लिए मेसी प्रेरणा हैं तो किसी के लिए नेमार, लेकिन सभी का सपना एक ही है—भारत को फीफा वर्ल्ड कप में देखना।
स्थानीय मैदानों, स्कूलों और कच्चे खेल मैदानों में हर दिन ऐसा माहौल रहता है मानो कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला चल रहा हो। खिलाड़ियों का कहना है कि वे ब्राजील की टीम से प्रेरित जरूर हैं, लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय तिरंगे को वैश्विक फुटबॉल मंच पर लहराते देखना है।
इस गांव के खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुलाकात कर चुके हैं और उन्होंने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस फुटबॉल संस्कृति का उल्लेख किया था। इसके बाद गांव की पहचान और मजबूत हुई।
स्थानीय कोचों के अनुसार यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद कई युवा आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद लगातार अभ्यास कर रहे हैं और कुछ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मैच देखकर नई तकनीक सीख रहे हैं।
गांव में फुटबॉल केवल खेल नहीं बल्कि एक जुनून और भविष्य का सपना बन चुका है। खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यदि उचित संसाधन और प्रशिक्षण मिले, तो शहडोल से निकला कोई खिलाड़ी आने वाले समय में विश्व फुटबॉल मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है।













