राजधानी में लंबे समय तक मलाईदार पदों पर रहे एक साहब जब भ्रष्टाचार रोकने वाले विभाग पहुंचे तो अपने ही साथियों की ऐसी चाल में फंस गए कि कहावत फिर सच साबित हो गई— करें कोई, भरे कोई।
नतीजा यह हुआ कि साहब को बनवास भुगतना पड़ा। लंबी प्रतीक्षा के बाद राजधानी वापसी हुई, लेकिन स्वागत से पहले ही कुछ पुराने खिलाड़ी फिर नई बिसात बिछाने में जुट गए हैं।













