मध्यप्रदेश की गलियों से लेकर गलियारों तक इन दिनों एक ही किस्सा तैर रहा है। ग्वालियर-चंबल के एक माननीय पुत्र मोह में ऐसे बहके कि स्थानीय पुलिस अधिकारी को खरी-खोटी सुना डाली। सत्ता और संगठन ने भी फुर्ती दिखाई, माननीय को समझाइश दी, फटकार लगाई और माफी तक मंगवा ली।
संदेश गया कि कानून और अधिकारियों का सम्मान सर्वोपरि है। लेकिन कुछ ही दिनों बाद तबादला सूची आई और संबंधित अधिकारी का नाम उसमें चमक उठा। अब लोग मुस्कराकर बस इतना कह रहे हैं— फटकार किसी को मिली, सजा किसी और को।













