दो सीमावर्ती जिलों में पदस्थ दो समकक्ष अधिकारियों की दोस्ती और फिर दूरी अब चाय की दुकानों तक पहुंच गई है। कभी एक जिले में दोनों की जोड़ी मिसाल मानी जाती थी, लेकिन वक्त बदला और रास्ते अलग हो गए।
किस्मत का खेल देखिए, नई पोस्टिंग भी ऐसे जिलों में हुई कि आमना-सामना टल ही नहीं पाता। मिलने पर मुस्कान कम और लोगों की जुबान पर यही गीत ज्यादा सुनाई देता है— जहां भी जाते हैं, वहीं चले आते हो।













