हिमाचल प्रदेश
15 Jun, 2026

न्याय और विधि का शासन लोकतंत्र की असली ताकत : राज्यपाल

धर्मशाला में ‘न्याय प्रबोध’ अभियान के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने न्याय, समानता और विधिक जागरूकता को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।

धर्मशाला, 15 जून।

राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में भारत सरकार के न्याय विभाग की ओर से आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव के दौरान राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने ‘न्याय प्रबोध : अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की नींव न्याय, समानता और विधि के शासन पर आधारित है तथा संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा और न्याय तक समान पहुंच का अधिकार प्रदान करता है।

राज्यपाल ने कहा कि न्याय केवल न्यायालयों से निर्णय प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था का निर्माण भी है जिसमें हर नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस कर सके। उन्होंने कहा कि समाज में न्याय की भावना को मजबूत करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म, तकनीक आधारित समाधान, विधिक जागरूकता अभियान और स्थानीय सहायता तंत्र न्याय को आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दिशा जैसी पहल के माध्यम से न्याय को लोगों के घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं टेली-लॉ सेवा, न्याय बंधु और विधिक साक्षरता कार्यक्रमों ने न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक केंद्रित बनाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि टेली-लॉ के माध्यम से दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए कानूनी सलाह प्राप्त करना काफी आसान हुआ है।

‘न्याय प्रबोध : अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का स्वागत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विधिक जागरूकता न्याय तक पहुंच का पहला कदम है। उन्होंने युवाओं से कानून के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में जागरूक नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों संविधान से शक्ति प्राप्त करती हैं और राष्ट्रहित में एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी व्यवस्थाओं ने उन लोगों को बड़ी राहत दी है जिन्हें आर्थिक या भौगोलिक कारणों से न्यायालय तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इन सेवाओं के माध्यम से नागरिक विशेषज्ञ अधिवक्ताओं से निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं तथा अधिवक्ताओं की फीस का वहन केंद्र सरकार करती है।

अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने 1,725 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया या उनमें संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव उसकी सोच में आया है और अब व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को अधिक प्रभावी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम के दौरान दिशा योजना के अंतर्गत ‘न्याय प्रबोध : अवेकनिंग टू जस्टिस’ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया गया। साथ ही टेली-लॉ सेवा के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस पहल से प्राप्त सुविधाओं और लाभों की जानकारी दी।

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