कहावत है कि गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है। मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण के बाद कुछ ऐसा ही हुआ। जिन पर कार्रवाई होनी थी, वे तो हुए ही, लेकिन एक जिले के कप्तान साहब भी लपेटे में आ गए।
बाद में पता चला कि उनका दोष तो फाइलों में भी नहीं मिला। अब साहब पुनर्वास की आस में दर-दर अपना बेगुनाहीनामा सुनाते घूम रहे हैं। फिलहाल उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि हर मुलाकात में कहते हैं- "गलती मेरी नहीं थी।"


















